
Mandir Mein Puja Ka Niyam: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान भाव के भूखे हैं यानी उनको भक्त से द्रव्य या पूजा विधि की चाह नहीं होती है। बस भक्त के मन की निश्चलता, निर्मलता उन्हें अपने पास खींच लाती है। भगवान की पूजा स्वीकार करने की एक ही शर्त है प्यार, सम्मान, दया और करुणा।
भगवान अपने भक्त में मानवता, मन की शुद्धता, प्यार और उनके रचे संसार के सम्मान की भावना ही देखना चाहते हैं। लेकिन अधिकांश भक्त चाहे आध्यात्मिक शांति या किसी न किसी समस्या से छुटकारे के लिए प्रार्थना करने जाते हैं तो भूलवश ऐसी गलती कर बैठते हैं, जिससे भगवान इन भक्तों से नाराज होकर उनकी प्रार्थना ही स्वीकार नहीं करते हैं। कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्री से आइये जानते हैं मंदिर में कौन सी गलती भूलकर भी नहीं करते (Pandit Pradeep Mishra Ke Upay)..
पंडित प्रदीप मिश्री ने बताया कि शिव पुराण कथा में बताया गया है कि भगवान किसी भी प्राणी में भेदभाव नहीं करते हैं। साथ में वो ऐसे भक्त पर कृपा रखते हैं, जिसके मन में दूसरों के प्रति दया और करुणा हो न कि उसमें भेदभाव और दुर्गुण देखने की प्रवृत्ति हो।
इसलिए कभी भी शिव मंदिर जाओ तो शंकर जी के सामने बैठकर किसी की पूजन की थाली में भी कोई कमी न देखना। बल्कि लगे कि पास वाले की थाली में किसी चीज की जरूरत है तो अपनी थाली में से उसको दे दें। प्रयास करना कोई कमी न देखें, अगर आप भगवान की साक्षी में भी कमियां देखेंगे तो आपके जीवन में कमियां बढ़ती जाएंगी।
यदि आप पशुपति, सोमवार व्रत, शिव रात्रि या प्रदोष का व्रत करो तो सबकी मदद करने का प्रयास करना। भगवान के सामने जितना संभव हो, किसी को कमी का एहसास न होने देना।