
सरकारी रिकार्ड में भगत सिंह आज भी आतंकी क्रान्तिकारी
Bhagat Singh: अमृतसर ( धीरज शर्मा ), शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने लीक से हट कर एक कदम उठाते हुए भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरू को शहीद (Martyre ) का दर्जा दिलाने के लिए केन्द्र सरकार को पत्र लिखने ( Letter to Central Government ) का निर्णय लिया है। हालांकि एसजीपीसी के इस निर्णय पर सवाल उठाए जा रहे हैं ( Questions Raise ) कि यह उसका काम नहीं है। इसके अलावा यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या भगत सिंह पूर्ण मर्यादा वाले सिक्ख थे। गौरतलब है कि भगतसिंह को सरकारी रिकार्ड ( Government Record ) में आज भी आतंकी (Terrorist ) क्रान्तिकारी लिखा जा रहा है। अगस्त 2013 में मनमोहन सरकार ने राज्यसभा में भगत सिंह को शहीद माना था, इसके बावजूद अब तक रिकॉर्ड में सुधार नहीं हुआ।
पुस्तकों में आतंकवादी क्रातिकारी पढ़ाया जा रहा है
शहीद भगत सिंह ब्रिगेड के प्रमुख और भगत सिंह के प्रपौत्र यादवेंद्र सिंह संधू कहते हैं कि आजादी के बाद सभी सरकारों ने सिर्फ नरम दल वालों को सम्मान दिया, जबकि गरम दल वाले क्रांतिकारी हाशिए पर रहे हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी में पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाई जा रही 'भारत का स्वतंत्रता संघर्षÓ नामक पुस्तक में शहीद भगत सिंह को जगह-जगह क्रांतिकारी आतंकवादी कहा गया था।
मनमोहन सरकार ने शहीद माना पर रिकार्ड में नहीं बदला
कांग्रेस की मनमोहन सरकार के भगत सिंह को शहीद मानने के बाद भी सरकारी रिकार्ड मे इस क्रान्तिकारी को आज भी क्रान्तिकारी आतंकी लिखा जा रहा है। देश को आजाद हुए सात दशक से अधिक हो गए, लेकिन आज भी किताबों में उन्हें क्रांतिकारी आतंकी लिखा जा रहा है। भगत सिंह को जो अंग्रेज मानते थे, आजादी के बाद सरकारी रिकॉर्ड में आज भी वही स्थिति है। उनके वंशज शहीद का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
एसजीपीसी के निर्णय पर विवाद
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को शहीद का दर्जा दिलाने के लिए एसजीपीसी केंद्र सरकार को पत्र लिखने के निर्णय पर विवाद हो गया है। सिख विद्वान सवाल खड़ा करने लगे हैं कि क्या भगत सिंह पूर्ण मर्यादा वाले सिख थे? क्या यह काम एसजीपीसी का है? यह किसी से छिपा नहीं है कि आम लोग तो भगत सिंह को शहीद-ए-आजम कहती है। लेकिन सरकार ऐसा नहीं मानती। देश को आजाद हुए सात दशक से अधिक हो गए, लेकिन आज भी किताबों में उन्हें क्रांतिकारी आतंकी लिखा जा रहा है।
पंजाब सरकार खड़े कर चुकी है हाथ
पंजाब सरकार ( Punjab Government ) भी भगत सिंह को शहीद का दर्जा देने पर अपने हाथ खड़े कर चुकी है। पंजाब सरकार ने संविधान के अनुच्छेद-18 के तहत एबोलिशन ऑफ टाइटल्स नियम का हवाला देते हुए कहा कि सरकार फौजियों के अलावा किसी को कोई टाइटल नहीं दे सकती। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट हरि चंद अरोड़ा ने सरकार को पत्र लिखकर भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग की थी। इस पत्र के जवाब में सरकार ने इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च द्वारा प्रकाशित किताब डिक्शनरी ऑफ मार्टियर्स : इंडियाज फ्रीडम स्ट्रगल का जिक्र करते हुए कहा है कि इस किताब में भारत के शहीदों का वर्णन है।
Published on:
21 Sept 2019 07:06 pm
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