13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Coronavirus के डर से पूरे देश में Lock down लेकिन श्री हरमंदिर साहिब में लंगर आज भी चालू

-स्वर्ण मंदिर में गुरु रामदास का लंगर कभी बंद नहीं होता -कोविड-19 के कारण श्रद्धालुओं की संख्या सैकड़ों में रह गई -अब लंगर सिर्फ दरबार साहब में बन रहा है, बाहर से नहीं आ रहा

3 min read
Google source verification
Golden temple

Golden temple

अमृतसर (धीरज शर्मा)। श्री हरमंदिर साहिब। इसे स्वर्ण मंदिर और दरबार साहिब के नाम से भी जाना जाता है। दुनिया में सिखों की आन-बान-शान का प्रतीक है। सिखों का सर्वाधिक पवित्र स्थल है। गुरु रामदास का लंगर यहां सर्वाधिक प्रसिद्ध है। दो लाख से अधिक श्रद्धालु प्रतिदिन लंगर छकते हैं। यहां दुनिया की सबसे बड़ी रसोई है। तालाबंदी और कर्फ्यू में भी लंगर सेवा चालू है। यह बात अलग है यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सैकड़ों में रह गई है। कोरोनावायरस को रोकने के लिए यहां पूरा इंतजाम है।

दो लाख श्रद्धालु प्रतिदिन आते हैं

दुनिया की सबसे बड़ी रसोई कही जाने वाली अमृतसर दरबार साहब के लंगर घर की रसोई आज भी चालू है। यहां आज भी सैकड़ों लोग आ रहे हैं। पंगत में बैठकर लंगर खा रहे हैं। सेवा भी कर रहे हैं। तालाबंदी के बाद अंतर फर्क बस इतना है कि पहले दो लाख से अधिक लोग आते थे और सैकड़ों आ रहे हैं। पहले लंगर लाखों के हिसाब से बनता था और बाहर से भी आता था। अब लंगर सिर्फ दरबार साहब में बन रहा है, बाहर से नहीं आ रहा है। पंगत में बैठकर एक साथ लंगर छकने की इस परंपरा से दुनिया प्रभावित है। लंगर तैयार करने व वितरण करने से लेकर बर्तन मांजने की पूरी व्यवस्था एक मिसाल है। संगत की पंगत में अमीर-गरीब और जाति-पांत का कोई भी बंधन नहीं है।

सुरक्षा कवच के साथ लंगर चालू

दरबार साहब के प्रबंधक रजिंदर सिंह रूबी ने बताया कि कोरोनावायरस की इस विपदा में भी लंगर चल रहा है। लोग आ रहे हैं। लंगर छक रहे हैं और गुरु रामदास के गुण गा रहे हैं।ह रसोई गुरु रामदास जी की चलाई हुई है। कोरोनावायरस के डर से पूरा देश बंद है लेकिन दरबार साहब की इस रसोई में श्रद्धालु पूरे सुरक्षा कवच के के साथ लंगर बना रहे हैं और लोगों को खिला भी रहे हैं। खिलाने के दौरान भी नियमों का पालन किया जा रहा है। श्रद्धालु विश्वासपूर्वक कहते हैं कि हम सचखंड साहब में मौजूद हैं तो हमें कुछ नहीं हो सकता। दरबार साहब लंगर हॉल के मैनेजर का कहना है कि श्रद्धालु लंगर खाकर अपने जूठे बर्तन अब सेनीटाइजर से भरे टप्प में डालते हैं। फिर दस्ताने पहने हुए सेवादार इन बर्तनों को टब से निकालते हैं और धोते हैं। इस तरह कोरोनावायरस के प्रकोप को रोकने का पूरा इंतजार है। देश में जब भी कोई कुदरती आपदा आती है तो यहां से लंगर तैयार कर भेजा जाता है। दरबार साहिब इस सेवा कार्य में भी लगा हुआ है।

1585 में शुरू हुआ निर्माण

सिखों को चतुर्थ गुरु रामदास ने स्वर्ण मंदिर का निर्माण 1585 में शुरू कराया। लाहौर के सूफी सन्त मियां मीर ने दिसम्बर, 1588 में गुरुद्वारे की नींव रखवाई थी। सन 1604 में बनकर तैयार हुआ। गुरु अर्जुन देव इसके वास्तुकार हैं। अमृतसर श्री हरमंदिर साहिब के चारों ओर बसा हुआ है। गुरुद्वारे के चारों ओर दरवाजे हैं। स्वर्ण मंदिर सफेद संगमरमर से बना हुआ है। इसकी दीवारों पर सोने की पत्तियों से नक्काशी की गई है। हरमन्दिर साहिब में पूरे दिन गुरबाणी गूंजती रहती है।