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पंजाब के चावल की विदेशों में मांग, मजदूरों के पलायन से धान की खेती पर संकट

गैर-बासमती धान का रकबा 57.27 लाख एकड़ -धान की खेती बाहरी मजदूरों पर आधारित है -सबसे ज्यादा बिहारी मजदूर करते हैं बिजाई

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paddy cultivation

paddy cultivation

अमृतसर (धीरज शर्मा)। पंजाब का किसान चिंता में है क्योंकि पंजाब से श्रमिक पलायन कर रहा है। कोरोनावायरस महामारी के चलते एक तो लॉकडाउन, दूसरा सिस्टम फेल और तीसरा मौसम की मार, यह सभी किसानों को मार रहे हैं। सबसे ज्यादा मार आने वाले दिनों में खेती में पड़ने वाली है क्योंकि पंजाब से 12 लाख मजदूर पलायन करता दिखाई दे रहा है। पंजाब की इंडस्ट्री की नींद तो उड़ाई ही है किसानों की भी नींद उड़ा दी है, क्योंकि आने वाले दिनों में खरीफ की फसल की बिजाई होनी है और यह सब बाहरी किसान करता है।

किसान की चिन्ता

फसल की कटाई तो जैसे तैसे हो गई कंबाइन से पर बात आती है बिजाई की। धान की बिजाई बिना मजदूर के नहीं होती। पूरे देश का पेट भरने के लिए पंजाब के किसान इन मजदूरों से जी तोड़ मेहनत करवा धान की बुआई करते हैं। जब फसल पकती है तो पूरा देश इस फसल से लबालब हो जाता है। कोरोना वायरस के चलते अभी पंजाब का किसान इस बात को लेकर आश्वस्त था कि पंजाब में लेबर काफी फ्री बैठी है, क्योंकि उद्योग चल नहीं रहे हैं, इसलिए काम आसानी से हो जाएगा। उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, राजस्थान व बिहार के श्रमिक उनको आसानी से इस बार मिल जाएंगे। इन सभी प्रवासी मजदूरों ने जब घर वापसी के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया तो उद्योगपतियों की नींद तो उड़ी ही, किसानों की चिंता भी बढ़ गई, क्योंकि घर जाने वाले किसान मजदूरों की संख्या कम नहीं है। इससे तो पूरा का पूरा खेती का ढांचा ही बिगड़ जाएगा। पंजाब में किसानी में भी बाहरी मजदूर ही ज्यादा काम करते हैं। गेहूं की फसल कट रही है और धान की बिजाई शुरू होनी है, पर मजदूर पलायन कर रहा है। ऐसे में जून में होने वाली धान की बिजाई पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

क्या कहते हैं आंकड़े

पंजाब में गैर-बासमती धान का रकबा 57.27 लाख एकड़ है। 2018 में यह रकबा 64.80 लाख एकड़ था। अब यह और बढ़ना था। पिछले साल भी पंजाब के किसानों को धान की रोपाई के लिए लेबर के जबरदस्त संकट का सामना करना पड़ा था। रेलवे स्टेशनों पर किसान विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रमिकों को अपने वाहनों में ले जाने के लिए इंतजार करते दिखाई देते थे। पिछले साल तो प्रति एकड़ रोपाई की मजदूरी बढ़कर 3000-3200 रुपये तक कर दी गई जो पहले 1500 रुपये प्रति एकड़ के आसपास होती थी। इसके अलावा मजदूरों को रहना, खाना पीना फ्री होता था। इस बार लॉकडाऊन और ट्रेनों की आवाजाही बंद होने का जबरदस्त असर देखने को मिलेगा।

क्या कहते हैं किसान नेता

अमृतसर किसान संघर्ष कमेटी के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह पन्नू कहते हैं कि किसान तो पहले ही उजड़ा हुआ है अब मजदूर यहां से चला जाएगा तो किसान सड़क पर आ जाएगा। किसानी को अगर बचाना है तो मजदूरों का पलायन रोकना होगा जालंधर से जम्हूरि किसान सभा के अध्यक्ष विक्रमजीत सिंह कहते हैं पंजाब में सबसे ज्यादा धान की खेती होती है और यह बाहरी मजदूरों पर टिकी हुई है। अगर मजदूर ही चला जाएगा तो खेती कैसे हो पाएगी। पंजाब का किसान इतना आत्मनिर्भर नहीं कि वह खुद धान की बुवाई कर सकें।

पीछे चला जाएगा पंजाबः प्रो. मानव

गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी खेतीबाड़ी विभाग के प्रोफेसर मानव कहते हैं पंजाब में पहले के मुकाबले धान की फसल अच्छी हो रही है क्योंकि पंजाब की जमीन धान की खेती के लिए उपयुक्त है। पंजाब में इस समय ज्यादातर बासमती, सरबती, परमल आदि कई किस्मों के धान बोए जाते हैं और इनकी भारत में ही नहीं विदेशों में भी मांग है जो कि पंजाब पूरी करता है। ऐसे में अगर पंजाब से मजदूर पलायन कर गया तो यह रकबा घट सकता है और पंजाब फिर से 20 साल पीछे जा सकता है।

बड़ा नुकसान होगाः निर्यातक

पंजाब चावल एक्सपोर्ट से जुड़े व्यापारी मणिकरण ढाला कहते हैं कि उनका देश-विदेश में चावल का बिजनेस है। वह पंजाब से बासमती चावल एक्सपोर्ट करते हैं जिसकी विदेशों में बहुत मांग है। कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते अगर मजदूर पंजाब से पलायन कर गया तो धान की खेती हो पाना मुश्किल है, जिससे बहुत बड़ा नुकसान होगा।