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गुरबानी, सिख इतिहास का नेतृत्व ही राष्ट्रीय चुनौतियों का एकमात्र समाधान है : रघबीर सिंह

एसजीपीसी-जैतो मोर्चा:समारोह  

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गुरबानी, सिख इतिहास का नेतृत्व ही राष्ट्रीय चुनौतियों का एकमात्र समाधान है : रघबीर सिंह

गुरबानी, सिख इतिहास का नेतृत्व ही राष्ट्रीय चुनौतियों का एकमात्र समाधान है : रघबीर सिंह

अमृतसर. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने गुरुद्वारा श्री गंगसर साहिब जैतो में एक भव्य गुरमति कार्यक्रम का आयोजन करके 'जैतो दे मोर्चे' के शताब्दी समारोह की शुरुआत की। मुख्य शताब्दी समारोह 21 फरवरी, 2024 को आयोजित किया जाएगा, जबकि इससे पहले शिरोमणि कमेटी द्वारा विभिन्न कार्यक्रम और सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं।

आज दीक्षा समारोह के अवसर पर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह, तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह, शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी सहित बड़ी संख्या में पंथ की प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने सिख समुदाय के गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेने और पंथ विरोधी ताकतों से सचेत रहने को भी कहा। उन्होंने कहा कि गुरबाणी के साथ-साथ सिख इतिहास का नेतृत्व ही देश को सही दिशा में ले जा सकता है और यही रास्ता राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि अपने इतिहास और विरासत पर कायम रहने पर सिख विरोधी ताकतें देश का कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं।

ज्ञानी रघबीर सिंह ने एक सदी पहले मोर्चे के दौरान अकाली योद्धाओं द्वारा किए गए बलिदानों को देश के लिए मार्गदर्शक बताया। उन्होने पंथक संस्थानों के खिलाफ झूठे प्रचार का जवाब देने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि अगर सिख पंथ की संस्थाएं मजबूत होंगी तो देश मजबूत होगा।

इस मौके पर शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि अकाली योद्धाओं का इतिहास खून से लथपथ रहा है, जिसका उदाहरण जैतो मोर्चा है। उन्होंने कहा कि इस मोर्चे के शहीद सिख राष्ट्र की पूंजी हैं। एडवोकेट धामी ने घोषणा की कि जैतो मार्च के दौरान जत्थे के साथ पहुंचे सिखों और शहीदों के गांवों और कस्बों में शताब्दी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और शहीदों के परिवार के सदस्यों को भी सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि फरवरी 2024 में खालसा पंथ की ओर से जैतो मोर्चे की शताब्दी बड़े पैमाने पर मनाई जाएगी।

इस दौरान तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि सिख समुदाय का इतिहास रहा है कि उन्होंने शक्तिशाली मुगल और ब्रिटिश सरकारों को चुनौती दी, जिसके आलोक में आज भी समुदाय को पंथ को कमजोर करने वाली रणनीति के खिलाफ संस्थानों को एकजुट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी सिखों की अग्रणी संस्था है, इसके खिलाफ दुष्प्रचार रोकने के लिए गंभीरता से प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होने पंजाब में नशीली दवाओं की समस्या को खत्म करने के प्रयासों को भी प्रोत्साहित किया।

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता डॉ दलजीत सिंह चीमा और शिरोमणि कमेटी के महासचिव भाई गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने भी अपने संबोधन के दौरान जैतो मोर्चे के शहीदों को याद किया और सिख युवाओं को उनके इस गौरवशाली इतिहास से मार्गदर्शन लेने के लिए कहा। इस अवसर पर जैतो मोर्चा से संबंधित विशेष रूप से तैयार की गई पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।