
10 दिन के रिमांड पर खालिस्तानी आतंकी, 'पाक' से यूं आते थे इनके लिए हथियार
(अमृतसर,धीरज शर्मा): पंजाब पर खालिस्तान समर्थक संगठनों की बुरी नजर का साया मंडरा रहा है। रविवार को तरनतारन के चोहला साहिब गांव से चार खालिस्तान समर्थक आतंकियों को पकड़ा गया। सोमवार को इन्हें अमृतसर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।
पाकिस्तान से आए हथियार...
पुलिस के अनुसार यह आतंकी 'खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स' (Khalistan Zindabad Force) को दोबारा जिंदा करने की कोशिश में थे। खास बात यह है कि इन्हें देश के बाहर से फंडिंग की जा रही थी। इस बारे में बड़ा खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि पाकिस्तान और जर्मनी में स्थित आतंकवादी संगठन इस काम में मदद कर रहे थे। गिरफ्तार आतंकियों के पास से पांच एके-47, पिस्तौल, सैटेलाइट फोन और हैंड ग्रेनेड भी बरामद किए गए थे। पता चला है कि यह सारी सामग्री पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए इन्हें पहुंचाई गई थी।
एनआईए के पास जाएगा केस...
सीएम (Punjab CM) कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों और साजिश के प्रभाव को देखते हुए केस एनआईए के सौंपने का फैसला किया है। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र से मांग रखी है कि सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन से नजर रखी जाए जिससे ऐसे सामान सीमा पार से नहीं आ पाए।
इन्हें पकड़ा गया
आतंकियों के बारे में जानकारी देते हुए डीजीपी दिनकर गुप्ता ने बताया कि काउंटर इंटेलिजेंस के एआईजी केतन बालीराम पाटिल की अगुवाई में विभिन्न टीमों ने बलवंत सिंह बाबा उर्फ निहंग, आकाशदीप सिंह उर्फ आकाश रंधावा, हरभजन सिंह और बलबीर सिंह को गिरफ्तार किया। आकाशदीप और बाबा की क्रिमनल बैकग्राउंड है, दोनों के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज हैं।
मान सिंह जो इस समय आर्म्स एक्ट और यूएपीए के तहत अमृतसर जेल में है, ने गुरमीत बग्गा के कहने पर आकाशदीप को भर्ती किया था। जब दोनों अमृतसर जेल में इकट्ठे थे। खेप को हासिल करने वाला बाबा बलवंत 'बब्बर खालसा इंटरनेशनल' का मेंबर है। उसे यूएपीए और आर्म्स एक्ट के तहत थाना मुकंदपुर, नवांशहर पुलिस ने गिरफ्तार किया गया था, वह अभी जमानत पर है। अमृतसर के स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल थाने में 22 सितंबर को मामला दर्ज किया गया है।
यह गिरोह 'खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स' के प्रमुख रणजीत सिंह नीटा (Ranjit Singh Neeta) और उसके जर्मन सहयोगी गुरमीत सिंह बग्गा उर्फ डॉक्टर द्धारा चलाया जा रहा था। स्थानीय स्लीपर सेल की मदद से इन्होंने और सदस्य बनाने का काम किया है। सरहद पार से फंड और हथियारों का प्रबंध किया जाता था।
Published on:
23 Sept 2019 09:31 pm
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