
PPE kit
अमृतसर। कोरोनावायस की महामारी के चलते एक तरफ लोग मर रहे हैं, वही कुछ लोगों की इस दौरान मानो लॉटरी सी लगी है। श्री गुरु नानक देव अस्पताल में काम कर रहे चार सेहत कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस के विरोध में अस्पताल का पैरामेडिकल स्टाफ हड़ताल पर चला गया है, वहीं अस्पताल के डाक्टर्स और नर्सिंग स्टाफ ने पीपीई किट की खरीद को लेकर अस्पताल प्रशासन को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। पीपीई किट इतनी घटिया है कि पहनते ही फट जाती हैं। घोटाले का आरोप लग रहा है।
भ्रष्टाचार का आरोप
कारण बताओ नोटिस के कारण तनाव में चल रहे पैरामेडिकल स्टाफ विशाल कुमार, राज कुमार व अमरपाल ने कहा कि इस समय दुनिया में जो हालात चल रहे हैं, उसके मद्देनजर सेहत कर्मी अपनी जान की परवाह किए बिना दिन रात एक करके सरकार के दिशा निर्देश अनुसार अपनी ड्यूटी कर रहे है। इसके बाद भी नोटिस दिया जा रहा है। उन्होंने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि जिन चार सेहत कर्मियों को शोकाज नोटिस दिया गया है, वह वापस लिया जाए। साथ ही लैबोरेट्री, नर्सिंग व मेडिसिन विभाग के डॉक्टर विरोध में उतर आए हैं। इनका कहना है कि इस किट से हम संक्रमित हो जाएंगे, क्योंकि गुणवत्ता बहुत नीचे स्तर की है। जब भी हम इस किट को पहनने की कोशिश करते हैं, यह फट जा रही है। आरोप है कि जिन किट्स को 41 लाख 43 हजार रुपये की लागत से खरीदने की बात अस्पताल प्रशासन कर रहा है, उस पर सात लाख से ज्यादा खर्च नहीं हुए।
पहनते ही फट जाती है पीपीई किट
इधर, वीरवार को मेडिसिन विभाग के कुछ डॉक्टर्स ने पीपीई किट्स पहनने की कोशिश की तो ये फट गईं। इस पूरे मामले में अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. रमन शर्मा सवालों के घेरे में हैं, क्योंकि सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कोरोना काल में मरीजों की तीमारदारी मे जुटे डॉक्टरों व सहयोगी स्टाफ को जरूरी सामान उपलब्ध करवाने के लिए एक करोड़ की राशि जारी की थी। राज्यसभा सांसद श्वेत मलिक ने भी पच्चीस लाख रुपये दिए। अस्पताल प्रशासन ने एक निजी कंपनी से दो हजार पीपीई किट्स मंगवाईं। एक लैब अटेंडेंट के अनुसार इन दो हजार पीपीई किट्स पर 41.43 लाख रुपये खर्च बताया गया। यह घटिया क्वॉलिटी की हैं। इसकी कीमत 400 रुपये प्रति किट से अधिक नहीं हो सकती। इसमें एन—95 मास्क तक नहीं है।
प्रिंसिपल और सांसद ने क्या कहा
इस मामले को लकर मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर एंड हेड व कोरोना के नोडल ऑफिसर डॉ. शिवचरण ने शिकायत ¨प्रसिपल डॉ. सुजाता शर्मा से की है। उन्होंने कहा कि हाई रिस्क में काम करने वाले डॉक्टरों व सहयोगी स्टाफ के साथ खिलवाड़ न किया जाए। इन्हें अच्छी क्वॉलिटी की किट्स उपलब्ध करवाई जाएं। भाजपा के राज्यसभा सांसद सांसद श्वेत मलिक ने कहा- मामले की जांच होनी चाहिए। आरोप साबित होने पर अधिकारियों पर कार्रवाई भी की जानी जरूरी है। इस मामले को लेकर गुरुनानक देव अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. रमन शर्मा का पक्ष जानना चाहा लेकिन उन्होंने पूरे दिन फोन नहीं उठाया।
Published on:
24 Apr 2020 10:15 pm
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