
चंडीगढ। पंजाब की कैप्टेन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार शिक्षा के मोर्चे पर खासी दिलचस्पी ले रही है और प्रदेश की समूची शिक्षा प्रणाली को इस तरह से तैयार करना चाहती है ताकि आने वाली पीढियां प्रदेश के इतिहास व संस्कृति से वाकिफ रहें और पूरी तरह पंजाबियत में रचें-बसें।
प्रदेश के पर्यटन व संस्कृति मंत्री नवाजोत सिद्धू व शिक्षा मंत्री अरूणा चैधरी ने मिलकर बुधवार को ऐसी शिक्षा प्रणाली का ढांचा तय करने के लिए एक पांच सदस्यों की कमेटी का गठन कर दिया। यह कमेटी तीन सप्ताह में एक मसौदा सौंपेगी और केबिनेट इस मसौदे पर मंथन कर शिक्षा प्रणाली को अंतिम रूप देगा।
सिद्धू व चैधरी ने इस कमेटी के गठन के बाद बताया कि पांच सदस्यों की कमेटी में पंजाब शिक्षा बोर्ड के चेयरमेंन,यूनिवर्सिटी के कुलपति,उच्च शिक्षा विभाग के सचिव और पंजाब कला परिषद के चेयरमंेंन सुरजीत पातर को शामिल किया गया है। यह कमेटी तीन सप्ताह में ऐसी शिक्षा प्रणाली का मसौदा तैयार करेगी जिसके जरिए पंजाब की आने वाली पीढियों को प्रदेश के गौरवशाली इतिहास व संस्कृति से व्यावहारिक ढंग से जोडा जा सके।
सिद्धू ने कहा कि यह योजना शिक्षा के साथ सभ्याचार के विवाह की है। ऐसी शिक्षा प्रणाली तो बहुत पहले तैयार हो जाना चाहिए थी। उन्होंने कहा कि अब मुख्यमंत्री कैप्टेन अमरिंदर सिंह के निर्देश पर यह काम किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री अरूणा चैधरी ने कहा कि आज नई शिक्षा नीति तैयार करने के लिए आयोजित बैठक ऐतिहासिक रही है।
प्रदेश की विरासत को ध्यान में रखकर ही शिक्षा नीति तैयार की जायेगी। अभी यह देखने में आ रहा है कि नई पीढी का पश्चिमीकरण हो रहा है। नई पीढी को अंग्रेजी पढने में फख्र महसूस होता है और पंजाबी पढते हुए शर्म आती है। नई पीढी को युद्ध नायकों व स्वतंत्रता सेनानियों,प्रदेश के पत्रकारों व लेखकों की जानकारी होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पंजाब देश में प्री प्राइमरी कक्षाएं शुरू करने वाला पहला राज्य बना है तो इतिहास व संस्कृति से जुडी शिक्षा प्रणाली लागू करने वाला भी पहला राज्य हो सकता है।
Published on:
13 Apr 2018 10:42 pm
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