
Davinder singh Bhullar
अमृतसर। कोरोनावायरस coronavirus का संक्रमण Coronavirus Infection फैलने से घबराई पंजाब सरकार Punjab government ने प्रदेश की अलग-अलग जेलों Jail से छह हजार कैदियों को पैरोल Parole पर रिहा करने का निर्णय किया है। इसी के मद्देनजर अमृतसर केंद्रीय जेल Amritsar central jail से दिल्ली बम धमाकों Delhi bomb blasts के मामले में सजा काट रहे आतंकी Terrorist प्रोफेसर दविंदर सिंह भुल्लर Davinder singh Bullar को पैरोल पर रिहा कर दिया गया। भुल्लर को 42 दिन की पैरोल दी गई है। वह 1990 के दशक में आतंक का पर्याय था। दिल्ली में नौ लोगों को कार बम Car bomb से उड़ाने की साजिश रचने के आरोप में उम्र कैद की सजा काट रहा है।
घर से बाहर जाने पर रोक
पैरोल के दौरान भुल्लर को किसी भी व्यक्ति से मिलने की इजाजत नहीं होगी। न ही वह घर से बाहर जा सकेगा। कड़ी सुरक्षा के बीच भुल्लर को उसके रंजीत एवेन्यू स्थित निवास भेजा गया। इमरजेंसी में घर से बाहर जाने से पहले उसे नजदीक के थाने को सूचित करना होगा। थाने की मंजूरी मिलने पर ही वह घर से बाहर निकल सकेगा। भुल्लर को दिल्ली बम धमाकों में फांसी की सजा हुई थी। सिख संगठनों व एसजीपीसी SGPC के प्रयासों के बाद फांसी को उम्रकैद में बदल दिया था। अमृतसर केंद्रीय जेल से अब तक 529 कैदियों को पेरोल पर रिहा किया जा चुका है।
25 अगस्त, 2001 को टाडा अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी
उच्चतम न्यायालय Supreme court द्वारा मौत की सजा Death बदले जाने के बाद से भुल्लर उम्रकैद life prison की सजा काट रहा है। उसे 25 अगस्त, 2001 को टाडा अदालत Tada court ने मौत की सजा सुनाई थी। शनिवार को जब जेल से बाहर निकला जो उसकी पत्नी नवनीत कौर और दूसरे रिश्तेदार बाहर मौजूद थे। आतंकवादी भुल्लर को गत वर्ष जून में दिल्ली की तिहाड़ जेल Tihar Jail of Delhi से अमृतसर केंद्रीय कारागार Amritsar Central Prison भेजा गया था। दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग Najeeb Jung, Lieutenant Governor of Delhi ने भुल्लर के ट्रांसफर ऑर्डर जारी किए थे।
एमएस बिट्टा की कार को बम से उड़ा दिया था
भुल्लर को 1993 में दिल्ली के रायसीना रोड Raisina Road of Delhi पर भारतीय युवक कांग्रेस Indian Youth Congress के कार्यालय के बाहर तत्कालीन अध्यक्ष एमएस बिट्टा Ms bitta की कार पर बम से हमला करने की साजिश में फांसी की सजा सुनाई गई थी। बिट्टा लगातार खालिस्तान का विरोध कर रहे थे। इस हमले में नौ लोगों की मौत हुई थी, जबकि बिट्टा सहित 25 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। हमले के वक्त भुल्लर एक इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर Professor in Engineering College था। पुलिस जांच में नाम आने के बाद भुल्लर जर्मनी Germany भाग गया और वहां राजनीतिक संरक्षण मांगा। जर्मनी ने इससे इनकार कर दिया। जर्मनी ने उसे भारत भेज दिया। वर्ष 1995 में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। भुल्लर को इस जुर्म के लिए सुप्रीम कोर्ट से भी फांसी हुई थी। राष्ट्रपति ने भी मई 2011 में उसकी दया याचिका खारिज कर दी थी लेकिन भुल्लर की पत्नी ने दया याचिका निपटाने में हुई आठ साल की अनुचित देरी को आधार बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट Supreme court से फांसी माफ करने की गुहार लगाई थी। इस पर मौत की सजा घटाकर उम्रकैद कर दी थी।
Updated on:
05 Apr 2020 11:14 am
Published on:
05 Apr 2020 11:12 am
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