
डाक्टर ने चार बच्चों को किया रैफर, सिविल सर्जन ने जांच कर कहा गंभीर नही यहीं करें इलाज
अशोकनगर. अस्पताल में मरीज तो इस उम्मीद से आते है कि उन्हें बेहतर इलाज मिलेगा लेकिन डॉक्टरों द्वारा उन्हें मनमाने तरीके से अन्य अस्पताल के लिये रैफर कर दिया जाता है।
ऐसा ही मामला शुक्रवार को जिला अस्पताल में देखने को मिला। जहां बीमारियों के कारण कमजोर हुए चार बच्चों को डॉक्टर द्वारा भोपाल रैफर कर दिया गया। जिन्हें बाद में सिविल सर्जन ने जांच की तो बताया कि यह तो यहीं ठीक हो जाएगें।
जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड भर्ती चार बच्चों को कमजोर बताते हुए डॉ. संतोष रघुवंशी द्वारा भोपाल रैफर कर दिया गया था। बच्चों को ले जाने परिजनों के पास वाहन सुविधा न होने के कारण वह सिविल सर्जन डॉ. हिमांशु शर्मा के पास एम्बुलेंस की व्यवस्था की बात करने पहुंचे तो सिविल सर्जन ने शिशु वार्ड में पहुंचकर बच्चों की जांच की तो पाया कि बच्चों का इलाज यहीं हो सकता है।
उन्होंने बताया कि निमोनिया आदि से कमजोर होने के कारण चिकित्सक ने उन्हें भोपाल रैफर कर दिया था। इन बच्चों का इलाज जिला अस्पताल में ही हो सकता है। इसलिये उन्होंने परिजनों को समझाइश दी तथा बताया कि बदलते मौसम में बच्चों का खास ख्याल रखेें और बच्चों को गुनगुना पानी दें।
लिफ्ट पर 24 घंटे तैनात रहेगें ऑपरेटर
जिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए लगाई गई लिफ्ट आयेदिन खराब हो जाने से मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। लेकिन अब लिफ्ट पर 24 घंटे ऑपरेटर तैनात रहेगें। सिविल सर्जन ने बताया कि एक दिसम्बर से लिफ्ट पर ऑपरेटर तैनात किये जाएगें जिसकी देखरेख में ही लिफ्ट चलेगी जिससे बार-बार लिफ्ट भी खराब नही होगी।
रात्रि में भी लिफ्ट में ऑपरेटर रहेगा जिससे मरीजों को भी दिक्कत नहीं होगी और बार -बार लिफ्ट खराब होने की समस्या खत्म हो जाएगी तथा लिफ्टमेन होने से लिफ्ट में स्वच्छता बनी रहेगी अभी मरीज व उनके परिजन लिफ्ट में थूंककर गंदा कर देते थे और लिफ्ट खराब हो जाने से बुजुर्गों, मरीजों व गर्भवती महिलाओं के लिये पहली मंजिल तक जाने में समस्या का सामना करना पड़ रहा था।
प्रसुति वार्ड में महिला गार्ड करेगें तैनात
सिविल सर्जन ने बताया कि प्रसुति वार्ड में अब पहली बार फीमेल गार्ड की तैनाती होगी। अभी तक पुरूष गार्ड ही प्रसुति वार्ड में पहरा देते हैं लेकिन अब एक दिसंबर से महिला गार्ड की तैनाती की जाएगी जिससे खासकर महिलाएं परेशानियों से बच सकेगीं।
जिला अस्पताल में अभी 10 से 12 पुरूष गार्ड हैं जो महिला कर्मचारी है वह रोगी कल्याण समिति की चतुर्थ श्रेणी की कर्मचारी हैं जिनकी प्रसुति वार्ड सहित गहन चिकित्सा इकाई आदि में ड्यूटी रहती है लेकिन अब प्रसुति वार्ड में महिला गार्ड की तैनाती होने से महिला मरीजों को काफी सहूलियत होगी।
जिला अस्पताल में हमारे द्वारा कुछ परिवर्तन किये जा रहे है। लिफ्ट खराब होने की बार-बार समस्या आ रही थी इसके लिये एक लिफ्ट ऑपरेटर की तैनाती की जा रही है तथा प्रसूति वार्ड में महिला गार्ड की तैनाती की व्यवस्था की जा रही है। चिकित्सक कई बार परिजनों के कहने पर रैफर कर देते है। शिशु वार्ड में बच्चों को देखा था रैफर करने लायक नही थे। बच्चे यहीं ठीक हो जाएगेें।
- डॉ. हिमांशु शर्मा, सिविल सर्जन व शिशु रोग स्पेशलिस्ट जिला अस्पताल
Published on:
30 Nov 2019 10:10 am
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