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किसान और व्यापारियों में हुई बहस आधे घंटे तक रुकी रही डाक

अशोकनगर. कृषि उपज मंडी में सोमवार को नीलामी बोली शुरू होते ही हंगामा हो गया। किसानों व व्यापारियों के बीच बहस होने के बाद मंडी बंद हो गई।

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praveen praveen

Jan 02, 2017

Agricultural Produce Market,

Agricultural Produce Market,

अशोकनगर. कृषि उपज मंडी में सोमवार को नीलामी बोली शुरू होते ही हंगामा हो गया। किसानों व व्यापारियों के बीच बहस होने के बाद मंडी बंद हो गई। करीब आधे घंटे बाद नीलामी फिर शुरू हो सकी। वहीं किसान नगदी न मिलने, चेक मौके पर न दिए जाने सहित अन्य कई समस्याओं से घिरे नजर आए और उन्होंने मंडी प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं।

शनिवार को करीब 01.30 बजे नीलामी बोली के समय सेमरापहाड़ के किसान उपकारसिंह की सोयाबीन की ट्राली की नीमामी हो रही थी। किसान का कहना था कि व्यापारी ने 2850 रुपए की बोली लगाई थी और कर्मचारी ने 2800 रुपए प्रति क्ंिवटल की पर्ची बना दी। इस बात पर व्यापारी व किसानों की बहस हो गई। हंगामा बढऩे पर नीलामी रोक दी गईऔर सभी एकत्रित होकर मंडी कार्यालय पहुंच गए। जहां समझाइश के बाद मंडी की नीलामी शुरू की गई।

मंडी का समय बदला

व्यापारियों की मांग पर मंडी का समय भी बदल दिया गया है। अब मंडी में डाक 1.00 बजे से शुरू होगी। इससे भी किसानों की परेशानी बढ़ गई है। पहले 10.00 बजे से 12.00 बजे तक एवं 02.00 से 05.00 बजे तक मंडी होती थी। सुबह जिन किसानों की फसल की नीलामी हो जाती थी, वे अपने दिन भर के काम निबटा लेते थे। लेकिन अब नीलामी में ही दिन निकल जाएगा।


नकदी के लिए कम दाम पर बेच रहे फसल

दूसरी ओर किसान नगदी से अब भी परेशान हैं। मंडी से चेक मिल रहा है, जिसे क्लियर करवाने में ही किसानों को 8-10 का समय लग जाता है। इसके कारण किसान को फसल बेचने के बाद भी पैसा नहीं मिल पाता। मजबूरी में किसान को नकदी के लिए फुटकर व्यापारियों को कम दाम में फसल बेचनी पड़ रही है। प्रति क्ंिवटल पर उन्हें 200 से 500 रुपए तक का घाटा उठाना पड़ रहा है।


मौके पर नहीं देते चेक

गोपालपुर के किसान यशपालसिंह यादव, धर्मेन्द्र साहू, कृष्णपाल सिंह आदि ने बताया कि व्यापारियों द्वारा मौके पर चेक नहीं दिया जा रहा है। चेक के लिए किसानों को उनके घर या ऑफिस में जाना पड़ता है। जबकि चेक तो व्यापारी किसानों को मौके पर ही दे सकते हैं। दूसरा किसान दो बजे के बाद ही चेक देते हैं। इसके कारण किसानों को अनावश्यक इंतजार करना पड़ता है और एक से दो घंटे चेक लेने में ही बर्बाद हो जाते हैं।


मंडी प्रशासन के सामने रखी मांगें

किसानों ने मंडी प्रशासन के सामने अपनी मांगें भी रखीं। किसानों ने कहा कि नकदी न मिलने से उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, तो किसानों से पांच हजार तक नकदी या सेल्फ चेक दिलवाए जाएं। ताकि फसल बेचने के बाद कुछ तो किसानों के हाथ लगे। साथ ही चेक मौके पर ही दिलवाने की व्यवस्था करने की मांग भी किसानों ने रखी। इस पर मंडी के प्रभारी सचिव बीडी चौबे ने अगली बैठक में यह बात रखने का आश्वासन दिया।


ये बताईं समस्याएं

-नकद एक चवन्नी तक नहीं मिल रही है, इसके कारण डीजल या घर पर कुछ सामान ले जाना तो उसके पैसे नहीं रहते।

-सोयाबीन का भाव अगर 3 हजार है तो फुटकर व्यापारी नकदी देने के नाम पर 20-22 सौ रुपए में ही ले रहे हैं।

-25-30 किमी दूर से किसान आता है और चेक क्लियर होने में ही दो से तीन चक्कर लग जाते हैं। उसके बाद कभी लिंक फैल होने तो कभी नगदी न होने के नाम पर पैसा नहीं दिया जाता।

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