अशोकनगर

सुबह से भूखे बैठे दिव्यांगों को नहीं मिला खाना तो अफसरों पर फूटा आक्रोश

सुबह 10 बजे से ही दिव्यांग पहुंच गए। आगे बैठे दिव्यांगों को भोजन पैकेट दे दिए लेकिन शेष दिव्यांगों को दोपहर 3 बजे तक भोजन पैकेट नहीं मिले और पैकेट खत्म हो गए।

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सुबह से भूखे बैठे दिव्यांगों को नहीं मिला खाना तो अफसरों पर फूटा आक्रोश

अशोकनगर. कार्यक्रम में सुबह से भूखे बैठे दिव्यांगों को दोपहर तीन बजे पता चला कि खाना खत्म हो गया है, तो खाना न मिलने से अधिकारियों पर दिव्यांग भड़क गए और नाराजगी जताई। सीईओ ने कहा इंतजार तो करो खाना मंगाया गया है, तो वहीं कई दिव्यांगों को उपकरण भी नहीं मिले, इससे वह बिना खाना और बिना उपकरण ही वापस लौट गए।

मामला विश्व विकलांग दिवस पर हुए सामाजिक अधिकारिता शिविर का है। फरवरी में हुए दिव्यांग परीक्षण शिविर में चिन्हित 706 दिव्यांगों को 6 4 लाख रुपए कीमत के 8 74 उपकरण व कृत्रिम अंगों का इस शिविर में वितरण होना था। सुबह 10 बजे से ही दिव्यांग पहुंच गए। आगे बैठे दिव्यांगों को भोजन पैकेट दे दिए लेकिन शेष दिव्यांगों को दोपहर 3 बजे तक भोजन पैकेट नहीं मिले और पैकेट खत्म हो गए। इससे दिव्यांगों ने नाराजगी जताई व अधिकारियों से कहा कि सुबह से भूखे बिठाए हुए हो। नाराजगी देख जनपद सीईओ ने दोबारा भोजन पैकेट मंगाए। शिविर में राज्यमंत्री बृजेंद्रसिंह यादव, सांसद केपी यादव, विधायक जजपालसिंह, जिपं अध्यक्ष जगन्नाथसिंह, कलेक्टर आर उमा महेश्वरी व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

दिव्यांग बोले-बैटरी वाली साइकिल की जगह पकड़ाई ट्राइसाइकिल

फरवरी में हुए जांच परीक्षण शिविर में दिव्यांगों ने बैटरी चलित ट्राइसाइकिल की मांग की थी, शनिवार को उपकरणों का वितरण हुआ तो सादा ट्राइसाइकिल देख उन्होंने नाराजगी जताई। चिन्हित को उपकरण बंटना थे, इससे करीब 300 उपकरण ही बंटे और अन्य लोगों को उपकरण नहीं मिले तो वह नाराजगी जताते दिखे कि सिर्फ भाषण सुनने बुला लिया जाता है। एक दिव्यांग तो सांसद से बोला कि दिल्ली में आपने मुझसे बैटरी वाली साइकिल देने का कहा था, इस पर सांसद ने उसे माला पहनाई और कहा वह भी देंगे।

मानवता: दोनों पैर से अपाहिज महिला, व्यक्ति ने दी साइकिल

एक पैर से दिव्यांग जलालपुर निवासी सुरेश पाल को ट्राइसाइकिल मिली, लेकिन सूची में नाम न होने से शहर के कछियाना मोहल्ला निवासी दोनों पैरों से अपाहिज गुड्डीबाई को नहीं मिल सकी। इससे सुरेश पाल ने अपनी ट्राइसाइकिल गुड्डीबाई को दे दी। सुरेश पाल ने कहा कि गुड्डीबाई को ज्यादा जरूरत थी, क्योंकि शिविर में जब तक वह पहुंचती थी तब तक शिविर खत्म हो जाते थे और उसका पति भी पैर से दिव्यांग है।

Published on:
04 Dec 2022 04:21 pm
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