
पीएनबी की सूची में डेढ़ हजार किसानों के नाम, प्रत्येक पर 13976 .31 रुपए का कर्ज
अशोकनगर. जिले में बैंकों द्वारा जारी की गई किसानों के ऋण की सूची में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। पीएनबी बैंक की सूची में करीब डेढ़ हजार किसानों में प्रत्येक पर 13976 रुपए और 31 पैसे कर्जा बताया गया। सूची देखकर किसानों ने ऋणराशि को योजना में घटाकर शामिल करने का आरोप लगाया और कहा कि ऋणमाफी के नाम पर किसानों के साथ छलावा किया जा रहा है।
फसल ऋणमाफी योजना के लिए बैंक शाखाओं और पंचायतों में किसानों के 31 मार्च 2018 की स्थिति के ऋण की सूचियां चस्पा की जा रही हैं। पंजाब नेशनल बैंक की अशोकनगर शाखा में 379 पेज की सूची चस्पा हुई, साथ ही इस सूची को जिले की वेबसाईट पर भी ऑनलाइन किया गया। बैंक की उस सूची में करीब डेढ़ हजार किसानों के नाम शामिल थे, लेकिन कर्ज की राशि प्रत्येक किसान के नाम पर एक समान 13976 रुपए 31 पैसे दर्ज मिली। लाखों के कर्जदार किसानों ने जब अपने नामों पर इतनी कम कर्ज राशि और सभी नाम पर बराबर राशि देखी तो भड़क गए और उन्होंने बैंक पर गड़बड़ी का आरोप लगाया, लेकिन बैंक ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह सूचियां एनआईसी द्वारा प्रदर्शित की जा रही हैं और जो कर्ज राशि दर्ज है वह भी एनआईसी ने ही प्रदर्शित की है। इससे किसानों ने अधिकारियों पर योजना के नाम पर छलावा करने का आरोप लगाया।
फसल ऋण वाले किसानों की योजना के तहत कर्जमाफी के लिए बैंकों ने शासन को सूचियां भेजीं और शासन ने उन सूचियों को एमपी ऑनलाइन पर दर्ज कर दिया। किसानों का मानना है कि शासन ने स्पष्ट तौर पर कहा कि सूचियों में जो कर्ज दर्ज दिखेगा, वही माफ होगा। इससे इस सूची की गड़बड़ी को यदि जल्दी ही नहीं सुधारा गया, तो ऋणमाफी के लिए योजना में ऋण की यही सूची शामिल होगी। इससे इन किसानों की सिर्फ 13976 .31 रुपए की कर्ज राशि ही माफ हो सकेगी।
कर्ज लाखों में, लेकिन सूची में बराबर
खास बात यह है कि प्रत्येक किसान पर इस बैंक का लाखों रुपए कर्ज है, लेकिन 31 मार्च की स्थिति में बैंक शाखा के इन सभी किसानों पर एक समान 13976 .31 रुपए कर्ज बताया गया है। किसानों का कहना है कि शासन जहां प्रत्येक किसान का दो लाख रुपए तक का फसल ऋण माफ करने की घोषणा कर रही है, लेकिन सूचियां इस तरह कर्ज राशि कम बताकर चस्पा की जा रही हैं।
ये बोले जिम्मेदार
हमारे स्तर से कोई गड़बड़ी नहीं हुई। बैंकों ने भोपाल सूचियां भेजीं और भोपाल से एमपी ऑनलाइन पर दर्ज हुईं। एमपी ऑनलाइन से निकालकर सूचियां हम चस्पा करवा रहे हैं। इसलिए यह गड़बड़ी कहां से हुई यह हमें पता नहीं है।
एसएस मरावी, उपसंचालक कृषि विभाग अशोकनगर
Published on:
21 Jan 2019 01:02 am
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