लगभग दो सप्ताह की देरी के बाद स्पेसएक्स के फाल्कन 9 ने रविवार को जापानी स्टार्टअप आईस्पेस के छोटे हकोतो-आर एम1 मून लैंडर को चंद्रमा की ओर प्रक्षेपित करने में सफलता हासिल की। यह जापान और एक निजी कंपनी का पहला मून-मिशन हो सकता है। इस पर यूएई का एक रोवर भी सवार है।
अमेरिका के फ्लोरिडा के केप कैनावेरल में एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने टोक्यो के स्टार्टअप आईस्पेस द्वारा निर्मित अंतरिक्ष यान को फाल्कन 9 रॉकेट से चंद्रमा के लिए प्रक्षेपित किया है। अभी तक सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन ही चांद की सतह पर रोबोट भेजने में कामयाब हुए हैं। आईस्पेस मिशन हकोतो-आर नामक एक कार्यक्रम का पहला है, जिसका जापानी में अर्थ 'सफेद खरगोश' है। कंपनी ने कहा कि उसके चंद्र लैंडर के अप्रैल 2023 में चंद्रमा के दृश्य पक्ष को छूने की उम्मीद है जो कि जापान में रैबिट ईयर भी है।
अरब दुनिया का भी पहला मून—मिशन
अंतरिक्ष यान के पेलोड में संयुक्त अरब अमीरात द्वारा निर्मित 10 किलोग्राम का रोवर शामिल है। खाड़ी देश अंतरिक्ष की दौड़ में नया है। अगर रशीद नाम का यह रोवर सफलतापूर्वक लैंड करता है तो यह अरब दुनिया का पहला मून मिशन होगा।
रॉक बैंड की सोराटो गीत की डिस्क भी
हकोतो 2018 की समय सीमा से पहले चंद्रमा पर रोवर उतारने के लिए गूगल की लूनर एक्सप्राइज प्रतियोगिता के पांच फाइनलिस्ट में से एक था, यह स्पर्धा बिना विजेता के ही समाप्त हो गई थी। आइस्पेस चंद्र लैंडर जापान की अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा निर्मित दो रोबोट और जापानी रॉक बैंड सकानैक्शन द्वारा 'सोराटो' गीत वाली एक डिस्क भी ले जा रहा है, जो मूल रूप से गूगल कॉम्पीटिशन के लिए लिखा गया था।
इजरायल का संगठन हो गया था फेल
इजरायली संगठन स्पेसिल इस प्रतियोगिता में एक और फाइनलिस्ट था जो अप्रैल 2019 में चंद्रमा पर उतरने के लिए निजी तौर पर वित्त पोषित पहला मिशन बनने में विफल रहा, जब उसका लैंडर उतरने का प्रयास करते समय सतह पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
चांद पर बस्ती बनाना है आईस्पेस का मिशन
आईस्पेस में केवल 200 कर्मचारी हैं। इसका उद्देश्य मानव जीवन के क्षेत्र को अंतरिक्ष में विस्तारित करना और चंद्रमा पर बार—बार जाने के लिए कम लागत वाली परिवहन सेवाएं प्रदान करके यहां बस्ती बसाना है।