
Indian Prime Minister Narendra Modi, Chinese President Xi Jinping and Pakistani PM Shehbaz Sharif (From right to left)
भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच पिछले साल जंग की स्थिति पैदा हो गई थी। 'पहलगाम आतंकी हमले' (Pahalgam Terrorist Attack) का जवाब देने के लिए भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindoor) लॉन्च करते हुए पाकिस्तान में कई आतंकी ठिकानों को तबाह करते हुए कई 100 से ज़्यादा आतंकियों को मार गिराया था। इसके बाद पाकिस्तान ने भी भारत पर ड्रोन्स और मिसाइलें दागीं, जिन्हें भारत ने मार गिराया। इसके बाद भारत ने पाकिस्तानी एयरबेसों पर हवाई हमले करते हुए पाकिस्तान को और गहरा जख्म दे दिया। बाद में पाकिस्तान के गिड़गिड़ाने पर भारत सीज़फायर पर सहमत हो गया था। अमेरिका (United States Of America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत-पाकिस्तान सीज़फायर का क्रेडिट लेने की कई बार कोशिश की, लेकिन भारत ने इसे खारिज कर दिया। कुछ दिन पहले इस मामले में चीन ने भी एंट्री ले ली है।
कुछ दिन पहले ही चीन की तरह से यह दावा किया गया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच जंग रुकवाने में उसने अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि भारत ने चीन के इस दावे को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि दोनों देशों के बीच सीज़फायर में किसी भी तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं थी।
चीन के इस दावे पर पाकिस्तान की तरह से प्रतिक्रिया सामने आ गई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि 6-10 मई के दौरान चीन लगातार भारत के संपर्क में था। अंद्राबी में साफ कर दिया कि दोनों देशों के बीच शांति करवाने में चीन का अहम योगदान था। हालांकि इस बयान से अंद्राबी ने ट्रंप के दावे को झुठला दिया है। गौरतलब है कि ट्रंप कई मौकों पर भारत और पाकिस्तान के बीच जंग रुकवाने का क्रेडिट लेने की कोशिश कर चुके हैं।
Updated on:
03 Jan 2026 03:06 pm
Published on:
03 Jan 2026 02:15 pm
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