8 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

Radha Ashtami 2025 : कब है राधा अष्टमी व्रत, जानिए तिथि, मुहूर्त और राधा रानी की पूजा विधि

Radhashtami 2025 इस साल 31 अगस्त को मनाई जाएगी। जानिए राधा रानी के जन्म की कथा, राधाष्टमी का महत्व, शुभ मुहूर्त और व्रत रखने से मिलने वाले लाभ।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Dimple Yadav

Aug 20, 2025

Radha Ashtami 2025

Radha Ashtami 2025 (photo- chatgtp)

Radha Ashtami 2025 : भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन राधा रानी का प्राकट्य हुआ था, जो भगवान श्रीकृष्ण की अनंत प्रेयसी और भक्ति की सर्वोच्च प्रतीक मानी जाती हैं। राधाष्टमी पर राधा-कृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, उनके मंत्रों का जप और स्तुति का पाठ करने से मनुष्य के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस दिन व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का क्षय माना जाता है।

राधाष्टमी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त

इस वर्ष राधाष्टमी 30 अगस्त 2025 को रात 10:46 बजे से प्रारंभ होगी और 31 अगस्त को देर रात 12:57 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत और पूजा 31 अगस्त 2025 को ही की जाएगी। इस्कॉन मंदिरों में भी इसी दिन राधाष्टमी का उत्सव मनाया जाएगा। इस दिन मध्याह्न काल में पूजा का विशेष महत्व है, जो प्रातः 10:42 बजे से दोपहर 1:14 बजे तक रहेगा।

राधाष्टमी का महत्व

राधाष्टमी का पर्व राधारानी की भक्ति और उनके प्रेम की अनुभूति का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन जो भी भक्त श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजन करता है, उससे राधारानी प्रसन्न होकर जीवन के दुख हर लेती हैं और भगवान श्रीकृष्ण भी स्वयं प्रसन्न हो जाते हैं।

राधा रानी के जन्म से जुड़ी मान्यताएं

राधारानी के प्राकट्य को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार वृषभानुजी और उनकी पत्नी कीर्तिजी को एक पुष्प के बीच से राधारानी प्राप्त हुई थीं। कहा जाता है कि राधा रानी ने सामान्य बालिका की तरह माता के गर्भ से जन्म नहीं लिया था, बल्कि वे माया के रूप में प्रकट हुईं।

एक अन्य कथा के अनुसार रुक्मिणी ही राधाजी का स्वरूप मानी जाती हैं। जब रुक्मिणी का जन्म हुआ था तो एक पक्षी उन्हें लेकर वृषभानुजी के पास आ गया। उन्होंने उस दिव्य बालिका को स्वीकार कर उसका नाम राधा रखा। इसी कारण राधा रानी के 28 नामों में एक नाम रुक्मिणी भी है।