ज्योतिषाचार्य प्रतीक भट्ट ने कहा , इसी पर बात करना चाहता था, लेकिन टीवी चैनलों पर जैसे तारीखों की कन्फ्यूजन दिखाई दे रही है, उस पर सीधी बात होना जरूरी है। ‘निर्णय सिंधु’ न तो नारायण ने लिखी, न वेदव्यास ने, न ऋषि पराशर ने, न भट्ट ने। इसे शताब्दी पहले एक ऐसे व्यक्ति ने लिखा था, जो धार्मिक ग्रंथों के बड़े ज्ञाता थे। उनसे गलती हो सकती है, इंसान हैं। तो अब जो लोग ‘निर्णय सिंधु’ के आधार पर पंद्रह तारीख कह रहे हैं, वो पंचांग के हिसाब से बात कर रहे हैंलेकिन ये सही नहीं है।