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Makar Sankranti date 2026 : मकर संक्रांति 14 या 15? सबसे बड़ा कन्फूजन दूर, जानें शास्त्र और सूर्य की सीधी बात

Makar Sankranti date 2026 : मकर संक्रांति 14 या 15 जनवरी? शास्त्र, सूर्य के मकर राशि प्रवेश और पंचांग विवाद को समझकर जानिए मकर संक्रांति की सही तारीख।

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भारत

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Manoj Vashisth

Jan 11, 2026

Makar Sankranti date 2026

Makar Sankranti date 2026 : मकर संक्रांति 14 या 15? सबसे बड़ा कन्फूजन दूर, जानें शास्त्र और सूर्य की सीधी बात (फोटो सोर्स: AI image@Gemini)

Makar Sankranti date 2026 : चौदह या पंद्रह, कौन सी तारीख सही है? मकर संक्रांति को लेकर यहां काफी चर्चा चल रही है। बाजार में भी यही सवाल है, टीवी और पोर्टल्स पर भी यही बहस हो रही है, और हमारे तमाम ज्ञानी लोग हर साल दीवाली से लेकर किसी भी त्योहार पर अलग-अलग तारीखें बताते रहते हैं। असल में, इसकी जड़ ‘निर्णय सिंधु’ नाम की किताब में है। ‘निर्णय सिंधु’ साफ कहती है कि पंद्रह तारीख को मकर संक्रांति है। एक टीवी बहस में ज्योतिषाचार्य प्रतीक भट्ट में साफ साफ बताया मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनना सबसे सही है।

ज्योतिषाचार्य प्रतीक भट्ट ने कहा , इसी पर बात करना चाहता था, लेकिन टीवी चैनलों पर जैसे तारीखों की कन्फ्यूजन दिखाई दे रही है, उस पर सीधी बात होना जरूरी है। ‘निर्णय सिंधु’ न तो नारायण ने लिखी, न वेदव्यास ने, न ऋषि पराशर ने, न भट्ट ने। इसे शताब्दी पहले एक ऐसे व्यक्ति ने लिखा था, जो धार्मिक ग्रंथों के बड़े ज्ञाता थे। उनसे गलती हो सकती है, इंसान हैं। तो अब जो लोग ‘निर्णय सिंधु’ के आधार पर पंद्रह तारीख कह रहे हैं, वो पंचांग के हिसाब से बात कर रहे हैंलेकिन ये सही नहीं है।

Makar Sankranti त्योहार का आधार क्या है?

सीधी सी बात है, त्योहार का आधार क्या है? सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करता है, तब मकर संक्रांति मनाते हैं। शनि की राशि में जब सूर्य आता है, उसी को मकर संक्रांति कहते हैं। ये नाम से ही साफ है। अब, इस बार चौदह तारीख को दोपहर के आस-पास, अलग-अलग क्षेत्रों में, सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेगा। तो मकर संक्रांति चौदह तारीख को ही होनी चाहिए।

मकर संक्रांति मतलब उत्तरायण की शुरुआत, यानी सूर्य का धन, समृद्धि और वैभव का वरदान। तो फिर पूजा अगले दिन क्यों करेंगे? त्योहार उसी दिन मनाना चाहिए, जब खगोलीय घटना हो रही है। पंद्रह तारीख को जो लोग मना रहे हैं, वो सिर्फ इसलिए कि उस दिन गुरुवार है, खिचड़ी खाने की परंपरा है, और कई लोग एकादशी के दिन चावल दान करवाते हैं। एकादशी अगर चौदह को है, तो वही सही है। सिर्फ परंपरा के नाम पर तारीख बदलना ठीक नहीं।

अब सवाल ये है कि क्या दोनों तारीखें मना लें?

सीधी बात है मुख्य पूजा चौदह तारीख को होनी चाहिए, मकर संक्रांति उसी दिन है। खिचड़ी या बाकी चीजें आप अगले दिन भी खा सकते हैं, वो आपकी मर्जी। यही साफ-साफ जवाब है।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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