पूर्णिमा के दिन ऐसी खगोलीय घटना घटी जिसका गवाह बनने के लिए खगोलविद और अन्य घड़ियों की तरफ टकटकी लगाए बैठे थे। चंद्रमा स्ट्राबेरी मून सा तो शुक्र आधा चमकता नजर आया। ऐसी दो अद्भुत घटना एक साथ कम ही दिखाई देती है।
हिंदू पंचांग में हर महीने की पूर्णिमा तिथि को अलग-अलग नाम से जाना जाता है, इसी तरह पश्चिमी देशों में भी अलग-अलग महीने के पूर्णिमा के चांद को अलग-अलग नाम से जाना जाता है। इस महीने में चांद धरती के करीब रहता है, इसलिए बड़ा और चमकीला भी नजर आता है। इधर इसी समय उत्तरी अमेरिका में स्ट्राबेरी की फसल पक रही होती है, इसलिए इस महीने के पूर्णिमा के चांद को स्ट्राबेरी मून भी कहा जाता है। कुछ जगहों पर इसे हनी मून या हाट मून के नाम से भी जाना जाता है। आज आकाश में स्ट्राबेरी मून ने खगोलविदों का मनमोह लिया।
भोपाल में नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने www.patrika.com को बताया कि ज्येष्ठ पूर्णिमा का चांद जहां आज पूर्व दिशा में स्ट्राबेरी मून नाम के साथ चमका तो वहीं पश्चिम दिशा में शुक्र अपनी चमक बढ़ाते हुए सूर्य के साथ सबसे अधिक कोणीय दूरी पर था।
इस समय दिखा स्ट्रॉबेरी मून
ज्येष्ठ पूर्णिमा चार जून के दिन स्ट्रॉबेरी मून रविवार को धरती के करीब था, जिसके कारण आज चांद का आकार अन्य दिनों की अपेक्षा 14 प्रतिशत अधिक बड़ा भी नजर आया। इसके अलावा यह अधिक चमकीला नजर आया। खगोलीय घटनाओं के अनुसार आज आपको मंगल और शुक्र ग्रह भी नजर आए।
ऐसी अगली घटना नौ जुलाई को
पूर्वी आकाश में स्ट्राबेरी मून के साथ ही पश्चिमी आकाश में रविवार को शुक्र ध्यान खींचता नजर आया। टेलिस्कोप से देखने पर यह आधा चमक रहा था। नेशनल अवार्ड प्राप्त विज्ञान प्रसारक सारिका घारू ने बताया कि सूर्य से दूसरा ग्रह शुक्र अपनी परिक्रमा करते हुए आज उस स्थिति में था, जब इसकी सूर्य से कोणीय दूरी 2023 के लिए सबसे अधिक थी । इसे वीनस एट ग्रेटेस्ट इलोंगेशन इस्ट कहते हैं । आज इस कारण वीनस का पूरा 50 प्रतिशत भाग सूर्य के प्रकाश से चमकता हुआ पृथ्वी से दिख रहा था । खगोलविज्ञान में इसे वीनस एट डायकोटॉमी कहते हैं । स्ट्राबेरी मून और वीनस का आधा भाग दिखने की घटनाएं एक साथ घटित हुईं। वीनस क्षितिज से 42 डिग्री एल्टीट्यूड पर रहते हुए माइनस 4.3 के मैग्नीट्यूड से चमचमा रहा था ।
सारिका ने बताया कि आमतौर पर शुक्र को देखने पर चमकता तो दिखता है लेकिन इसका 50 प्रतिशत से कम भाग ही चमकता दिखता है। सामान्य आंखों से देखने पर ऐसा लगता है मानो पूरी डिस्क चमक रही हो । अब इसकी चमक और बढ़ेगी और 9 जुलाई को यह सबसे चमकदार दिखेगा । सारिका ने बताया कि शाम के समय वीनस एट डायकोटॉमी की अगली घटना 12 जनवरी 2025 को देख पाएंगे।