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Thaaipusam 2026 Date: थाईपुसम कब है? यहां जानिए डेट , शुभ मुहूर्त और महत्व

Thaaipusam 2026 Date: थाईपुसम का पर्व खासतौर पर तमिलनाड़ू में मनाया जाता है। ये पर्व तमिल सौर महीने में पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल थाईपुसम कब मनाया जाएगा। यहां नोट करें इसकी तिथि और महत्व।

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Thaaipusam 2026 Date

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Thaaipusam 2026 Date: थाईपुसम का दिन भगवान मुरुगन की पूजा के लिए समर्पित होता है। ये त्योहार तमिल सौर महीने में थाई में मनाया जाता है। इसका महत्व हिंदू पंचांग के मकर मास जितना ही होता है। थाईपुसम का त्योहार भारत और विदेशों में रहने वाले तमिल समुदाय के लोगों के लिए बहुत ही खास माना जाता है। ये त्योहार उस समय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, जब मां पार्वती ने भगवान मुरुगन को दिव्य वेल का आशीर्वाद प्रदान किया था। ये वरदान उनको राक्षस सोरापदम का अंत करने के लिए दिया था। उसके बाद भगवान मुरुगन ने राक्षस सोरापदम का वध करके विश्व में संतुलन की स्थापना की थी। उस दिन ये पर्व हर साल इस दिन मनाया जाने लगा। आइए जाने साल 2026 में थाईपुसम किस दिन मनाया जाएगा।

थाईपुसम डेट 2026

थाईपुसम का पर्व तमिल सौर महीने में थाई के दिन पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूसम नक्षत्र का प्रारंभ 1 फरवरी 2026 को सुबह 01.34 मिनट पर होगी और इसका समापन 1 फरवरी 2026 को रात 11.58 बजे होगा। ऐसे में इस साल थाईपुसम 1 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा।

थाईपुसम 2026 का शुभ मुहूर्त


इस दिन पूरे दिन पूसम नक्षत्रम बना रहेगा, इसलिए थाईपुसम पूजा और अनुष्ठान के लिए पूरा दिन बहुत ही शुभ रहने वाला है। इस साल आप 1 फरवरी को 2026 को पूरे दिन थाईपुसम की पूजा कर सकते हैं।

थाईपुसम का महत्व


थाईपुसम का दक्षिण भारत में बहुत ही खास महत्व है। ये त्योहार उस समय पर मनाया जाता है, जिस समय पूर्णिमा थाई महीने में पूसम नक्षत्र के साथ पड़ती है। इस पर्व का खगोलीय भी बहुत अधिक महत्व है। इस दौरान आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार बहुत अधिक होता है।

थाईपुसम पर्व क्यों मनाया जाता है


थाईपुसम पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र भगवान मुरुगन की पूजा के लिए समर्पित होता है। भगवान मुरुगन को ज्ञान और दैवीय शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस दिन को बुराई के ऊपर अच्छाई के जीत के रूप में मनाया जाता है। वैदिक परंपरा में वेल को ध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। ये हमारे भीतर से अंधकार और अज्ञान को समाप्त करने में सहायक होता है।

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