हस्तलिखित कुरान के बारे में मदरसे के नाजिम अब्दुल मन्नान चिश्ती ने बताया कि लगभग 60 वर्ष पहले की बात है, उस समय अपने पिता रफी खान के साथ विद्यालय परिसर में बैठे थे। उसी दौरान उस समय लगभग 45 वर्षीय सांवले रंग का कुर्ता-पैजामा पहने एक व्यक्ति पहुंचा और कहा कि यह पुस्तक आपके मजहब की है इसलिए इसे रख लें। पुस्तक के पन्नों पर सोने का पानी देख पिता जी की आंखें चुुंधिया गयीं। आने वाले व्यक्ति से पुस्तक के बारे में पूछताछ की गयी तो उसने बताया कि वह एक चोर है और चोरी उसका काम है। यह पुस्तक एक सेठ के यहां चोरी के दौरान उसकी तिजोरी में मिली।