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किसानों को नहीं मिल पा रहा ढैंचा का बीज, अब कैसे तैयार होगी हरी खाद

सरकारी गोदामों पर चेहरा देख किया जा रहा है वितरण

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किसानों को नहीं मिल पा रहा ढैंचा का बीज, अब कैसे तैयार होगी हरी खाद

किसानों को नहीं मिल पा रहा ढैंचा का बीज, अब कैसे तैयार होगी हरी खाद

आजमगढ़. कोरोना के संक्रमण के चलते मजदूरों की समस्या से जूझ रहे किसानों के सामने अब नई समस्या खड़ी हो गयी है। सरकार किसानों को जरूरत के मुताबिक ढैंचा का बीज तक उपलब्ध नहीं करा पा रही है। जो बीज सरकारी गोदामों पर उपलब्ध है वह भी किसानों का चेहरा देख कर दिया जा रहा है। हालत यह है कि बिना पहुंच वाले किसान तमाम प्रयास के बाद भी बीज हासिल नहीं कर पाए। विभाग गोदाम पर तैनात कर्मचारियों को दोषी बताकर ममाले से पल्ला झाड़ रहा है। इनका दावा है कि बीज पर्याप्त है जितनी डिमांड थी दिया गया।

किसान धान की फसल लगाने के पहले ढैंचा की बुआई कर खेत में हरी खाद तैयार करता है ताकि उत्पादन बढ़ सके। इस बार सरकार द्वारा 850 कुंतल ढैंचा का बीज जिले को उपलब्ध कराया गया था। इस बीच का वितरण सभी आठ तहसीलों में होना था। बीच खरीदने पर पंजीकृत किसानों को 40 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था है।

मार्च माह में बारिश के बाद ही किसान हरी खाद बोना चाहता था। उस समय ब्लाकों पर बीज नहीं था। अप्रैल में बीज आया तो ब्लाक स्तर की गोदामों पर बैठे लोग पहले अपने खास किसानों जिनकी ऊंची पहुंच है उनमें बीज का वितरण किए। परिणाम रहा कि छोटे और गरीब किसान ब्लाकों का चक्कर काटकर रह गए लेकिन बीज नहीं पाए। मार्टीनगंज ब्लाक में तो दोबारा बीज आया लेकिन फिर भी सभी किसानों को नहीं मिला। अब बोआई का समय लगभग निकल चुका है। इसके बाद भी किसान प्रयासरत है कि बीज मिल जाए ताकि बोआई कर छोटे पौधे को पलट कुछ खाद तैयार कर सके लेकिन विभाग बीज उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। बाजार में बीज उपलब्ध है लेकिन उसे 6 हजार से 65 सौ रुपए कुंतल बेचा जा रहा है जो गरीब किसानों की पहुंच से दूर है। हरी खाद तैयार न कर पाने वाले किसान धान का उत्पादन गिरने के डर से परेशान है।

इस मामले में जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार गुप्ता का कहना है कि जितनी डिमांड की गई थी उतना बीज दिया गया। अभी अजमतगढ़ ब्लाक में बीच उपलब्ध है अगर कोई किसान चाहे तो ले सकता है। पर सवाल यह है कि कोई किसान पचास से साठ किमी जाकर कैसे बीज ला सकता है। मार्टीनगंज ब्लाक की महिला किसान आशा देवी, राजबली, राम चंदर, जितेंद्र सिंह आदि का कहना है कि गोदामों पर खुलेआम मनमानी की गयी। पहले तो अपने खास लोगों को बीज दिया गया फिर जब बीज कम हो गया तो दस पांच किलो देने की बात की जाने लगी। किसी को 50 किलो बीज की जरूरत थी तो गोदाम के इंचार्ज पांच किलो देने की बात करते है। आखिर किसान क्या करे।