
धान की नर्सरी (फाइल फोटो)
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. बरसात होने के बाद से ही किसान खरीफ की तैयारियों में जुटा है। मक्का आदि की बोआई के साथ ही धान की नर्सरी लगायी जा रही है लेकिन अक्सर देखा गया है कि नर्सरी लगाते समय किसानों द्वारा की गयी छोटी सी चूक न केवल नर्सरी को समय से तैयार नहीं होने देती बल्कि उत्पादन पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि किसान नर्सरी लगाते समय बीज की गुणवत्ता, खर पतवार नियंत्रण, बीज शोधन आदि पर ध्यान दे तो न केवल उसकी नर्सरी अच्छी होगी बल्कि वह उत्पादन को भी डेढ़ गुना तक बढ़ा सकता है।
सस्य वैज्ञानिक डा. आरके सिंह व फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डा. आरपी सिंह का कहना है कि उच्च गुणवत्ता के बीज, स्वस्थ एवं रोग रहित नर्सरी के लिए महत्वपूर्ण है। अच्छी नर्सरी तैयार करने के लिए हमें कुल खेत का आठ से दसवां भाग उपयोग में लाना चाहिए। जिससे नर्सरी विरल एवं किल्लेयुक्त हो। साथ ही हमें खर पतवार नियंत्रण पर भी विशेष ध्यान देना होता है। स्टेल तकनीक (समय पूर्व सिचाई) से खरपतवारों को उगाकर जोताई के माध्यम से नष्ट कर देना चाहिए। बीजों का चुनाव क्षेत्रवार एवं अवधि के ध्यान में रख कर करते हैं।
उन्होंने बताया कि हमे धान के प्रजाति का चयन खेत और क्षेत्र देखकर करनी चाहिए। ऊंचाई वाले कम सिंचित क्षेत्रों में धान की मोटी किस्में जैसे नरेंद्र 2064, 65, नरेंद्र ऊसर 2008, शुष्क सम्राट, नरेंद्र 97, सहभागी, स्वर्णा सब-वन, डीआरआर-44, सीएस-51 आदि धानों की रोपाई करनी चाहिए। यह प्रजातियां 100 से 125 दिन की अवधि में पककर तैयार हो जाती है। इसी तरह पानी लगने वाले क्षेत्रों में महीन श्रेणी में सांभा मंसूरी, मालवीय धान 1,2, सुआटस 1,4, बीपीटी 5204, सांभा सब-वन, दफ्तरी, भूषण आदि धान की फसल लगानी चाहिए। यह प्रजातियां 135 से 155 दिन में पककर तैयार होती हैं।
नर्सरी लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान
वैज्ञानिकों का कहना है कि धान की नर्सरी लगाते समय हमें तकनीकी बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इससे न केवल नर्सरी अच्छी होती है बल्कि उत्पादन भी बढ़ जाता है। इसलिए नर्सरी में नर्सरी क्षेत्र में कंपोस्ट सहित प्रति बिस्वा 1 किलों डीएपी, 01 किलो पोटास, एक किलो फेरस सल्फेट का प्रयोग अवश्य करें। बीज को दो फीसद नमक के घोल में भिगो कर तैरने वाले धान (पाई) को अलग कर लें। उसके बाद 12 से 18 घंटे के लिए स्वच्छ और कारर्बोक्सीन 37.5 प्रतिशत प्लस थीरम 37.5 प्रतिशत (2.5 ग्राम प्रति किलो बीज) की दर से मिश्रित पानी के घोल में भिगोना चाहिए। अंकुरित बीजों को लेवयुक्त नर्सरी में इस प्रकार छिड़कना चाहिए, जिससे दानों के बीच में दो सेमी की जगह अवश्य हो। इससे पौध का जमाव विरल एवं किल्लेयुक्त होते हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा है कि नर्सरी कम अवधि में तैयार होती है और पौध की कम संख्या में कम गहराई तक रोपाई आसान हो जाती है। जिक सल्फेट 50 ग्राम प्रति 10 वर्ग मीटर के दर से जैविक खाद के साथ 15 दिन की अवस्था पर प्रयोग करने से स्वस्थ और निरोग पौध तैयार होती हैं। यदि किसान नर्सरी लगाते समय इन बातों का ध्यान दे तो निश्चित तौर पर उसका उत्पादन बढ़ जाएगा।
BY Ran vijay singh
Updated on:
26 May 2021 09:39 pm
Published on:
24 May 2021 08:30 am
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