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‘करूणा, दया व प्रेम की सागर थीं मदर टेरेसा’

मदर टेरेसा को संत घोषित होने पर ज्योति निकेतन स्कूल में आयोजित हुई प्रार्थना सभा

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Ahkhilesh Tripathi

Sep 04, 2016

jyoti niketan school organised a program in respec

jyoti niketan school organised a program in respect of mother teresa

आजमगढ़. ज्योति निकेतन स्कूल में रविवार को मदर टेरेसा के संत घोषित होने पर आयोजित प्रार्थना सभा को सम्बोधित करते हुए फादर लुइस ने कहा कि मदर टेरेसा करूणा, ममता, दया एवं प्रेमभाव की सागर थीं। उन्होंने सदैव दीन-दुखियों की मदद कीं। प्रत्येक व्यक्ति उनके इन गुणों को अपने अंदर समावेश करें और समाज की सेवा निःस्वार्थभाव से करें।


मदर टेरेसा के एक साक्षात्कार पर चर्चा करते हुए फादर लुइस ने कहा कि एक बार पत्रकार ने मदर टेरेसा से पूछा कि आप यह सेवा का कार्य लोगों के धर्म परिवर्तन के लिए करती हैं। मदर ने तुरंत जवाब दिया कि हां परिवर्तन करती हूं लेकिन मेरा परिवर्तन को हिन्दू को एक अच्छा हिन्दू, मुस्लिम को अच्छा मुस्लिम और ईसाई को अच्छा ईसाई बनाने के लिए होता है।


ज्योति निकेतन के उप प्रधानाचार्य फादर डिलफी ने कहा कि मदर टेरेसा ने समाज को एक नई दिशा दी है। लोगों के मन में प्रेम की भावना जागृत की। उनके इस कार्य के लिए 1979 में उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया तो 1980 में भारत सरकार ने देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा। हमें उनसे प्रेरणा लेकर अच्छे कार्य करना चाहिए।

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