आजमगढ़

लोकसभा चुनाव में आजमगढ़ सीट पर अखिलेश यादव को चुनौती देगा ‘मृतक’

लाल बिहारी ’मृतक’ को 30 जुलाई 1976 में कागजों में मृत घोषित कर दिया गया था ।

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आजमगढ़. जिदा रहते हुए भी कागजों में मृत घोषित कर दिए जाने और फिर लंबी लड़ाई के बाद अभिलेखों में जिदा होने के बाद हमेशा चर्चा में रहने वाले लालबिहारी ’मृतक’ ने एक बार फिर लोकसभा चुनाव लड़ने का मन बना लिया है। उन्होंने मंगलवार को आजमगढ़ संसदीय सीट से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र खरीदा। हालांकि नामांकन पत्रों की जांच एवं वापसी के बाद ही तय हो सकेगा कि वे चुनाव लड़ेंगे कि नहीं।

आजमगढ़ के विधानसभा क्षेत्र मुबारकपुर के अमिलो गांव निवासी निवासी लाल बिहारी ’मृतक’ को 30 जुलाई 1976 में कागजों में मृत घोषित कर दिया गया था। कार्यालयों का चक्कर लगाते-लगाते परेशान हो गए थे। उसके बाद तो उन्होंने अपनी बात रखने का दूसरा और नायाब तरीका तलाश किया। नौ सितंबर 1986 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वीपी सिंह के कार्यकाल में विधानसभा में अपनी बात लिखा पर्चा का गोला बनाकर फेंका। मार्शल ने चार-पांच घंटे बाद छोड़ा। इसके बाद तो लालबिहारी ने अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए लोकसभा और विधानसभा का चुनाव लड़ने की ठान ली। लालबिहारी ने बातचीत में बताया कि नामांकन पत्र ले लिया है लेकिन कब दाखिल करेंगे, यह अभी नहीं बताएंगे।


मृतक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल बिहारी ’मृतक’ ने फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन के इस्तीफे के बाद 1988 में इलाहाबाद सीट से वीपी सिंह के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा। 1989 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से राजीव गांधी के मुकाबले नामांकन किया था। 2004 में आजमगढ़ के लोकसभा क्षेत्र लालगंज (सुरक्षित) से भी चुनाव लड़ा। इसके अलावा वह आजमगढ़ के ही मुबारकपुर विधानसभा क्षेत्र से 1991, 2002 और 2007 में भी चुनाव लड़ चुके हैं ।

BY- RANVIJAY SINGH

Published on:
17 Apr 2019 09:32 pm
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