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अब घर का सपना पूरा करना नहीं होगा आसान, बढ़ने वाले हैं ईटों के दाम

- चक्रवाती तूफान और बारिश से ईंट कारोबार को पहुंची है भारी क्षति- लाखों का नुकसान झेल रहे ईंट भट्ठा संचालक भरपाई के लिए बढ़ा सकते हैं रेट

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अब घर का सपना पूरा करना नहीं होगा आसान, बढ़ने वाले हैं ईटों के दाम

अब घर का सपना पूरा करना नहीं होगा आसान, बढ़ने वाले हैं ईटों के दाम

आजमगढ़. तीन दिन हुई बारिश और चक्रवाती तूफान ने सिर्फ किसानों की कमर नहीं तोड़ी है, बल्कि ईंट कारोबारियों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। कच्ची ईंट पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं वहीं, पकाए जा रहे ईंटों की क्वालिटी भी प्रभावित होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसकी सीधा असर आम आदमी पर पड़ने वाला है। कारण कि भट्ठा मालिक नुकसान की भरपाई के लिए ईंटों का मूल्य बढ़ा सकते हैं।

बारिश के कारण जिले में 30 से 35 प्रतिशत तक कच्चे ईट का नुकसान हुआ है। बससात के कारण कच्चे ईंट का सेप बिगड़ गया है। यहां कुल 501 ईट-भट्ठा संचालित हो रहे हैं। इस समय प्रति भट्ठा एक से डेढ़ लाख ईंट सुखाने के लिए रखे गए थे जो पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। सभी भट्ठों में ईट पकाने के लिए आग भी लगाई जा चुकी है। बरसात के कारण आग भी कमजोर पड़ गयी है। इससे न केवल ईंट पकाने की लागत बढ़ रही है बल्कि क्वालिटी पर भी असर पड़ना तय है।

दाम बढ़ाएंगे ईंट- भट्टा संचालक
ईट-भट्ठा संचालक सुनील यादव का कहना है कि मिट्टी, मजदूरी आदि लेकर कच्चे ईट की पथाई प्रति हजार कम से कम छह सौ रुपये पड़ जाता है। अब जब बारिश से भीगे ईंट की पथाई में अब दोगुना यानी 1200 रुपये खर्च आएगा। एक तो कोयला मांग के सापेक्ष बहुत कम आ रहा है और 15 हजार रुपये टन मिल रहा है। इस समय पका ईंट 6000 रुपये प्रति हजार यानी 12 हजार रुपये प्रति ट्रॉली बिक रही थी, लेकिन बारिश के कारण जिले में प्रति भट्ठा 60 से 70 हजार रुपये की क्षति हुई है। इस तरह कुल लगभग 35 लाख रुपये के कच्चे ईट का नुकसान का अनुमान है। ऐसे में दोबारा पथाई, मौसम के अनुसार 10 दिन से अधिक समय सूखने में लग जाएगा। इसके कारण 15 से 16 हजार रुपये प्रति हजार ईट भी बिक सकता है।