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नशे के लिए सुलेशन का उपयोग कर रहे युवा 

जानलेवा हो सकता है नशे का यह लत 

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Ahkhilesh Tripathi

Apr 09, 2016

drugs

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आजमगढ़. कहते है कि नशा कोई भी हो वह इंसान को मौत की ओर ले जाती है। चाहे व शराब, ड्रग्स हो या कुछ और लेकिन युवाओं को शायद मौत का भी खौफ नहीं रहा। यहीं वजह है कि वे उन पदार्थो का उपयोग नशा पूर्ति के लिए कर रहे है जो नशीले पदार्थो से भी खतरनाक है। खास तौर पर नाबालिग बच्चे जो परिवार की बंदिश और समाज के डर से खुले आम नशा नहीं कर पाते अब सुलेसन तक का सहारा नशा पूर्ति के लिए कर रहे है। सुलेसन का इस्तेमाल ऐसे हो रहा है जैसे हेरोइन और चरस का होता है। अहम बात है कि इस पर न तो सरकार की बंदिश है और ना ही परिवार के लोगों को जानकारी। दुकानदार निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए सब कुछ जानने के बाद भी सुलेसन बच्चों को बेच रहे है।

इसपर यकीन करना भी मुश्किल है कि कोई सुलेसन का उपयोग नशे के रूप में कैसे कर सकता है लेकिन यह सत्य है। जिस तरह पहले लोग कफ सीरप का उपयोग नशे के लिए करते थे वैसे ही आज सुलेशन का हो रहा है। जबकि यह सुलेसन कंपनियों पाइप आदि को जोडने के लिए बनाती है।

कैैसे होता है उपयोग
लोग सुलेसन को खरीदकर उसे सूती कपड़े में लगाकर चीलम में डाल देते है फिर उसमें आग लगाकर गांजे की तरह कश (पीना) लेते है। जिन्हे चीलम नहीं मिलती वे सीधे नाक से धुंआ निगलते है। इसका उपयोग करने वालों की माने तो यह शराब, गांजा और हेरोइन की तरह ही नशा करता है।

इंक रिमूबर पेंट का भी कर रहे उपयोग
यहीं नहीं स्कूली छात्र इंक रिमूबर, पेंट आदि का भी उपयोग नशे के लिए कर रहे है। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो रिमूबर आदि को बच्चे रूमाल में लगाकर सूंधते है इससे उन्हें नशे की अनुभूति होती है। कुछ समय बाद जब इसका नशा कम होता है तो वे दूसरे नशीले पदार्थो का उपयोग करने लगते है।

क्या कहते हैं चिकित्सक
वरिष्ठ चिकित्सक डा. विनय कुमार सिंह यादव का कहना है कि यह युवाओं के लिए जहर है। यह ड्रग्स एडिक्ट होने की पहली सीढ़ी है। इंक रिमूबर, पेंट, सुलेसन आदि जिसमें कार्बनिक पदार्थो की मात्रा पायी जाती है उसके उपयोग से लोगों के मस्तिष्क को वैसा ही आनंद मिलता है जैसा ड्रग आदि के उपयोग से मिलता है। धीरे-धीर जब डोज बढ़ता है तो वे दूसरे नशीले पदार्थो की तरफ बढ़ते जाते है। यह बेहद खतरनाक है।

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