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नर्मदा बचाओ आंदोलन के 33 दिन पूरे,  दिल्ली में होगी बैठक

मध्यप्रदेश के बड़वानी जिले के राजघाट पर सरदार सरोवर बांध का जल स्तर बढ़ जाने को लेकर नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता पिछले 33 दिनों से सत्याग्रह कर रहे हैं। बुधवार को सत्यग्रहियों ने दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की बैठक में बांध के गेट बंद होन व पर्यावरण के मुद्दे पर चर्चा करेंगे।

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Editorial Khandwa

Aug 31, 2016

33 days of the Narmada Bachao Andolan,

33 days of the Narmada Bachao Andolan,



बड़वानी.
नर्मदा बचाओ आंदोलन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस आंदोलन में समर्थन दिया है। राजघाट में चल रहे जल, जंगल, जमीन हक सत्याग्रह स्थल पर मंगलवार को प्रभावितों ने भजन-भक्ति कर सरकार की सद्बुद्धि की कामना की। इस दौरान यहां भजनों का दौर चलता रहा। पिछले 33 दिन से सत्याग्रह कर रहे प्रभावित यहां बांध के गेट बंद होने का विरोध कर रहे हैं।


बैठक में यह होंगी चर्चाएं

बांध के गेट बंद करने के संबंध में बुधवार को दिल्ली में पर्यावरण मंत्रालय की बैठक होगी। 6 साल बाद हो रही इस बैठक में पुनर्वास, पर्यावरण, बांध के प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इस बैठक के बाद ये तय किया जाएगा कि बांध के गेट लगेंगे या नहीं। इस बैठक की जानकारी के बाद नर्मदा बचाओ आंदोलन सहित समर्थन दलों पर्यावरण मंत्रालय के बाहर सोमवार को प्रदर्शन भी किया। देशभर के संगठन नर्मदा बचाओ आंदोलन के साथ बांध का विरोध करने के लिए खड़ हुए हैं। ये नर्मदा घाटी को विनाश से बचाने के लिए आंदोलन का साथ दे रहे हैं।



देश के अन्य संगठनों का भी समर्थन

नर्मदा घाटी को बचाने के लिए नर्मदा पट्टी और पहाड़ी क्षेत्रों के प्रभावितों के साथ ही सत्याग्रह को देशभर के जनसंगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। प्रभावित यहां पूर्ण पुनर्वास और जमीन के बदले जमीन नहीं मिलने तक बांध के गेट लगाने का विरोध कर रहे हैं।


आबाद गांवों को उजाड़ रही सरकार

प्रभावितों ने बताया कि सरकार आबाद गांवों को उजाडऩे पर तुली हुई है। अभी भी हजारों परिवारों का पुनर्वास बाकी है। कई परिवारों को जमीन के बदले जमीन नहीं दी गई है। जिन लोगों से मुआवजे के रुपयों को हाथ नहीं लगाया, उन्हें भी डूब का सामना करना पड़ रहा है। सरकार लोगों के बारे में बिल्कुल नहीं सोच रही है। विकास के नाम पर नर्मदा घाटी के गांवों की जल समाधि देने की पूरी तैयारी हो चुकी है। हम अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं और इसमें पीछे नहीं हटेंगे।


गांव डुबोने की बात पर अड़े अधिकारी

प्रभावित गांवों के लोगों ने बताया कि हम हजारों बार कार्यालयों के चक्कर काट चुके हैं। इससे भी कोई फायदा नहीं है। अधिकारी किसी की सुनने को ही राजी नहीं है। जिन लोगों की जमीनें व घर डूब रहे हैं, उनसे किसी को कोई मतलब नहीं है। ये सिर्फ डूबोने की बात पर अड़े हुए हैं। बिना पुनर्वास के बांध के गेट बंद करना पूरी तरह से गैरकानूनी और अन्यायपूर्ण है। इसके खिलाफ डूब गांवों के लोग एकजुट होकर लड़ाई लड़ रहे हैं।



- सत्याग्रह स्थल पर भजन करते आंदोलनकारी

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