
शासकीय स्कूलों में कार्यरत मध्याह्न भोजन रसोइया अपनी मांगों को लेकर 37 दिनों से रायपुर में हड़ताल कर रहे हैं। बच्चों को स्कूल में भोजन नहीं मिल रहा है। इधर राज्य सरकार ने इन रसोइयों की मांगों पर सुध नहीं ली है। शिक्षा विभाग को रसोइयों की हड़ताल के बारे में मालूम है, लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम कि कितने स्कूलों में माध्यह्न भोजन बन रहा है और कितने स्कूलों में नहीं। सच्चाई यह है कि जिले के अधिकांश स्कूलों में चूल्हा ही नहीं जल रहा है। बच्चे घर से भोजन टिफिन में ला रहे हैं या फिर भोजन करने घर जा रहे हैं।
जिला शिक्षा विभाग के मुताबिक जब रसोइया हड़ताल में गए, उससे पहले ही माध्यह्न भोजन संचालनकर्ताओं को निर्देशित किया गया कि किसी भी हाल में मध्याह्न भोजन बंद न हो। इसके बाद भी कई स्कूलों में इसका पालन नहीं हो रहा है। रसोइयों ने कहा कि हमारी मांग जायज है। हम आंदोलन करने को मजबूर हैं। जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
मध्याह्न भोजन रसोइया संघ के जिला संरक्षक प्रमोद यादव ने बताया कि वर्तमान में रसोइयों को सरकार प्रति दिवस 66 रुपए दे रही है। महीने में दो हजार रुपए देते हैं। यह भी राशि हर माह नहीं मिलती। इतनी कम राशि में कैसे गुजर बसर करेंगे। चुनाव के समय कई घोषणाएं रसोइयों के लिए हो जाती है। बाद में सब भूल जाते हैं। सरकार कभी गंभीरता से समझे कि कितनी तकलीफ रसोइयों को हो रही है।
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रसोइया संघ के जिला अध्यक्ष नुकेश सोनवानी ने बताया कि आंदोलन के दौरान दो रसोइयों का तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता। रसोइयों के घर की क्या स्थिति है, उसकी भी जानकारी लेनी चाहिए।
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जिला शिक्षा अधिकारी बालोद मधुलिका तिवारी ने कहा कि जिलेभर के रसोइया अपनी मांगों को लेकर आंदोलन पर हैं। हमने मध्याह्न भोजन प्रभावित न हो, इसलिए संचालक समूह को निर्दर्शित किया। जिले के कितने स्कूलों में मध्याह्व भोजन बन रहा है और कितने में नहीं, इसकी जानकारी ली जाएगी।
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Updated on:
03 Feb 2026 11:42 pm
Published on:
03 Feb 2026 11:41 pm

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