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आसाम से आर्मी का जवान बड़े अरमान से लाया था ये आम, आज सड़न रोग का हुआ शिकार

आसाम से आर्मी का जवान बड़े अरमान से लाया था ये आम आज सड़न रोग का हुआ शिकार

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बहराइच. जिले के थाना रामगांव क्षेत्र के मुसल्लमपुर निवासी शामून अली पुत्र यशीन अली एक रिटायर्ड आर्मी के जवान हैं। जो सेना की नौकरी से रिटायर होने के बाद अपने गृह जनपद बहराइच में स्थित गांव के फार्म हाऊस में खेती किसानी करके अपना वक्त गुजार रहे हैं।

आपको बता दें कि शामून अली के पास एक आम का बाग है जिसमें तरह तरह के आम के पेड़ लगे हुए हैं। जिसमें एक दुर्लभ प्रजाति का कटेहरी आम का भी पेड़ लगा हुआ है। जो उत्तर प्रदेश के आस पास के जिलों में सिर्फ बहराइच जिले में ही एक मात्र कटेहरी प्रजाति के आम का पेड़ है। इस आम की दुर्लभ प्रजाति पर ख़तरे के बादल मंडरा रहे हैं। आम की इस दुर्लभ प्रजाति पर मंडरा रहे इस खतरे ने रिटायर्ड फौजी शामून अली के लिये एक बड़ा चिंता का सवाल बन गया है।

अपने हाथ में सड़ा हुआ एक कटेहरी आम को लेकर जिले के उद्यान विभाग के निरीक्षक आर .के .वर्मा के दफ्तर में पहुंचे सेवानिवृत फौजी ने शामून अली ने बताया कि वो इस आम की प्रजाति को लगाने के लिये आसाम में अपनी तैनाती के दौरान कटेहरी आम की एक गुठली लेकर आये थे। उस गुठली को अपने बाग में लगाया था। शामून अली का कहना है कि उनके बाग में लगे कटेहरी आम के पेड़ में डेढ़ किलो से लेकर दो किलो तक के आम के फल लगते हैं। जो काफी समय तक चलते हैं। यही नहीं इस आम की मिठास और खुशबू अन्य आमों के स्वाद की अपेक्षा कई गुना ज्यादा बेहतर है। लेकिन इस बार इनके बाग में लगे कटेहरी आम के फलों में किसी अनजान रोग नें इस कदर दबे पांव दस्तक दे दिया है कि पेंड़ में लगा आम धीरे धीरे काला होने के बाद सड़कर जमीन में नीचे गिर जाता है। इस बारे में उद्यान निरीक्षक आरके वर्मा ने भी बताया कि कटेहरी आम की प्रजाति मुख्यता बांग्लादेश प्रान्त में पायी जाती है।

उद्यान निरीक्षक ने बताया कि ये आम का फल सड़न रोग है। जिससे निजात पाने के लिये एक लीटर पानी में 4 ग्राम सुहागा और 4 ग्राम तूतिया का घोल बनाकर पेड़ पर छिड़काव करने से फल सड़न रोग को रोका जा सकता है। वहीं पूरे बाग में छिड़काव के लिये चूना एक किलोग्राम और तूतिया 100 ग्राम की मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलाकर बाग में स्प्रे करने से अन्य तमाम तरह के रोग लगने से आम के फलों को बचाया जा सकता है।