
बहराइच. भले ही सरकार ने साहूकारी प्रथा को गैरकानूनी करार दे रखा हो लेकिन बहराइच में साहूकारी प्रथा अपने चरम पर है। साहूकार के आतंक से पीडि़त एक किसान द्वारा रविवार को अपने ही खेत में पेड़ से लटक कर आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। वह अपने पीछे तीन मासूम बच्चे और वृद्ध पिता को छोड़ गया है। वह ही घर का कमाने वाला अकेला सदस्य था। पिता की तहरीर पर पुलिस ने साहूकार के विरुद्ध मामला दर्ज कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस आरोपी साहूकार को भी गिरफ्तार करने की बात कह रही है।
घटना थाना हरदी क्षेत्र के मैकू पुरवा गांव की है। यहां के निवासी जगदीश यादव ने साहूकार से पचास हजार रुपये १५ प्रतिशत प्रति माह की ब्याज दर पर लेकर खेत जोतने का हल लिया था ताकि वह उससे मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण कर सके, लेकिन उसकी वह मंशा पूरी नहीं हो सकी। साहूकार के ब्याज के बोझ तले दब कर जगदीश ने मौत को गले लगा लिया। परिजनों के मुताबिक मृतक जगदीश ने इलाके के एक साहूकार से पचास हजार रुपये कर्ज लिए थे। पैसा अदा करते रहने के बावजूद साहूकार ने उन पर ब्याज सहित डेढ़ लाख ऊपर की देनदारी तय कर दी। गरीबी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बोझ तले दबे जगदीश इतनी भारी रकम अदा करने में लाचार था। परिजनों के मुताबिक दो दिनों से साहूकार उस पर रुपए अदा करने या खेत लिखने का दबाव डाल रहा था, जिसको लेकर उसने जगदीश को धमकी दी अगर उसने उसका पैसा आदा नहीं किया या फिर उसके नाम बैनामा नहीं किया तो वह उसके खेत पर कब्जा कर लेगा।
साहूकार की धमकी के आगे बेबस लाचार जगदीश के सामने आत्महत्या के अलावा कोई चारा नहीं बचा था। चंद बीघे जमीन उसके परिवार की जीविका का साधन था जिससे परिवार का पालन पोषण ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा था। जगदीश अपने पिता की इकलौती संतान था, वह अपने पीछे तीन छोटे-छोटे मासूम बच्चे छोड़ गया है। बूढ़े पिता बेटे के गम में इतने डूबे हैं कि उनके कदम चलने को लाचार है। वृद्ध लाचार पिता अब कैसे अपने बेटे के परिवार का बोझ उठाएगा? बूढ़े पिता को क्या पता था कि उसके बुढ़ापे का सहारा उनकी आंखों के सामने मौत को गले लगा लेगा। वृद्ध लाचार पिता की आंखों से बहते आंसू बेबसी दास्तान कह रहे हैं। साहूकार की धमकी से भयभीत जगदीश ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुबह उसका शव उसके खेत में लगे पेड़ से लटका हुआ मिलने से इलाके में सनसनी फैल गयी।
इस आधुनिक युग में भी जब बैंक और सरकारी योजनाएं लोगों की मदद करने के लिए उनके दरवाजे पर खड़ी हैं वहीं दूसरी ओर साहूकार कानून की आंख में धूल झोंककर समानांतर बैंकिंग व्यवस्था चलाकर भोले भाले गरीब और जरूरतमंद लोगों का शोषण करने पर आमादा हैं। वह साहूकारी प्रथा के जरिए गरीब लोगों को ऊंचे ब्याज पर जरूरत की रकम मुहैया करा कर उनका सालों-साल शोषण किया करते हैं। कुछ ऐसा ही हादसा जगदीश के साथ भी घटा 50,000 कर्ज के बदले लाखों रुपए अदा करने के बावजूद उस पर डेढ़ लाख का कर्ज बना रहा। घटना की सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हालांकि पुलिस ने साहूकार के विरुद्ध मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। पुलिस आरोपी साहूकार को सिर्फ गिरफ्तार करने की बात कर रही है।
Published on:
06 May 2018 10:24 pm
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