2 अप्रैल 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

वन्य प्राणियों की दहशत, खतरे में मानव जीवन, विस्थापन की उठ रही मांग

दिन में भी गांव में ही आ जाते हैं हिंसक वन्य प्राणीवनग्राम चिखलाबड्डी, नवेगांव के ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

2 min read
Google source verification
06_balaghat_102.jpg


बालाघाट. वन्य प्राणियों की चहलकदमी से ग्रामीणों में दहशत है। पालतु मवेशियों का शिकार और फसलों को नुकसान पहुंचाने के बाद अब मानव जीवन भी खतरे में आने लगा है। आलम यह है कि अब ग्रामीण अपना पूरा गांव खाली करना चाहते हैं। दोनों ही गांव पहुंचने के लिए घने जंगलों के बीच से सफर करना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से विस्थापन की गुहार भी लगाई है। मामला जिले के लालबर्रा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत जंगलों के बीच बसे वन ग्राम चिखलाबड्डी और नवेगांव का है।
जानकारी के अनुसार वन ग्राम चिखलाबड्डी और नवेगांव जंगलों के बीच बसा हुआ है। ये दोनों ही ग्राम वन मंडल दक्षिण सामान्य वनवृत्त बालाघाट के वन परिक्षेत्र सामान्य लालबर्रा के अंतर्गत आते हैं। सोनेवानी का जंगल सिवनी पेंच और कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के कॉरीडोर से जुड़ा हुआ है। जंगल में बाघ, तेंदुए, बायसन, भालू, चीतल, सांभर सहित अन्य वन्य प्राणियों की संख्या अधिक है। ये वन्यप्राणी गांवों में प्रवेश कर जाते हैं। पालतु मवेशियों को भी अपना शिकार बना लेते हैं। इतना ही नहीं फसलों को भी नुकसान पहुंचा देते हैं। फिलहाल, वन्य प्राणियों ने किसी भी मानव को क्षति नहीं पहुंचाई है। लेकिन वन्य प्राणियों की गांव में चहलकदमी ने ग्रामीणों में दहशत पैदा कर दी है।
दोनों गांव की आबादी 416
दोनों ही वनग्राम की आबादी महज 416 है। जिसमें नवेगांव में 210 और चिखलाबड्डी में करीब 206 ग्रामीण निवासरत हैं। दोनों ही ग्राम के पूरे ग्रामीण विस्थापन की मांग कर रहे हैं। पूर्व में भी ग्रामीणों ने प्रशासन से गुहार लगाई थी। वहीं 5 मार्च को भी ग्रामीणों ने जनसुनवाई में पहुंचकर कलेक्टर से गुहार लगाई है।
वन्यप्राणी के दिखने पर बदल देते हैं रास्ता
ग्रामीणों के अनुसार वन्यप्राणियों के चलते उनका गांव से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। रास्ते में हिंसक वन्यप्राणी दिखने से वे अपना रास्ता बदल देते हैं। शाम ढलने के दौरान वे अपने गांव नहीं पहुंच पाते हैं। ग्रामीणों के साथ ऐसी स्थिति रोजाना उत्पन्न होती है।
फसलों को पहुंचाते हैं नुकसान
वन्य प्राणी फसलों को ज्यादा नुकसान पहुंचा रहे हैं। जिससे प्रतिवर्ष ग्रामीणों को आर्थिक क्षति हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार एक तो वे कम भूमि में कृषि कार्य करते हैं। लेकिन वन्य प्राणियों के चलते उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ता है। यह समस्या वर्षों से बनी हुई है।
इनका कहना है
वनग्राम नवेगांव जंगलों के बीच बसा हुआ है। हिंसक वन्य जीवों की चहलकदमी होते रहती है। वन्यप्राणियों से ग्रामीणों को खतरा बना हुआ है। शाम ढलने के पूर्व ही हमें अपने घरों में कैद होना पड़ता है। इस कारण गांव छोडऩा मजबूरी बन गई है।
-बाबूलाल वाहने, ग्रामीण नवेगांव
वन्यप्राणी प्रतिवर्ष फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। जिससे ग्रामीणों को आर्थिक क्षति होती है। वन्य प्राणियों के कारण रास्ते से आवागमन नहीं कर पाते हैं। मार्ग पर दिख जाने से रास्ता बदलना पड़ता है। पूरे गांव के विस्थापन के लिए प्रशासन से गुहार लगाई गई है।
-चंदन सिंह तेकाम, ग्रामीण चिखलाबड्डी
वन्यप्राणियों के कारण न तो ग्रामीण बेहतर जीवन जी पा रहे हैं और न ही स्कूली बच्चे शिक्षा अध्ययन करने जा पा रहे हैं। वन्य प्राणी दिन में ही गांव में आ जाते हैं। हर समय खतरा बना रहता है। गांव छोडऩे पर ही इस समस्या से निजात मिल सकती है।
-शिवकुमार धुर्वे, ग्रामीण नवेगांव

बड़ी खबरें

View All

बालाघाट

मध्य प्रदेश न्यूज़

ट्रेंडिंग