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यहां महिलाओं ने संभाल रखी है परिवार नियोजन की जिम्मेदारी, पुरुषों का नहीं रुझान

9 हजार के लक्ष्य में 2879 महिला व सिर्फ 700 पुरुषों ने अपना परिवार नियोजन

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9 हजार के लक्ष्य में 2879 महिला व सिर्फ 700 पुरुषों ने अपना परिवार नियोजन

9 हजार के लक्ष्य में 2879 महिला व सिर्फ 700 पुरुषों ने अपना परिवार नियोजन

जिले के पुरुषों में दशकों पुराना मिथक और वहम अभी भी कायम है। इस कारण परिवार नियोजन को लेकर पुरुष आगे नहीं आ पा रहे हैं। वहीं महिलाओं ने लगभग पूरी तरह परिवार नियोजन की जिम्मेदारी संभाल रखी है। जिले में हर साल परिवार नियोजन को लेकर विभाग को नसबंदी ऑपरेशन का लक्ष्य प्राप्त होता है। लेकिन आसान, सरल और सुविधाजनक होने के बावजूद जिले के पुरुष नसबंदी को लेकर अभी भी कतरा रहे हैं। आलम यह है कि जहां हर साल महिलाएं हजारों की संख्या में परिवार नियोजन कराती हैं, वहीं पुरुषों की संख्या तीन सैकड़ा के आसपास ही सिमट कर रह जाती है।

जिला स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों पर नजर दौड़ाए तो इस वर्ष विभाग को 9801 महिला-पुरुषों के नसबंदी करवाने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है। लक्ष्य की अपेक्षा अभी तक 2801 महिलाओं और केवल 905 पुरुषों ने ही नसबंदी ऑपरेशन करवाए हैं। हालाकि इस विभाग की प्रभारी एएसओ श्रद्धा सिंह के अनुसार जिले में पुरुष नसबंदी की स्थिति संतोषजनक है। पुरुष नसबंदी के मामले में बालाघाट जिला प्रदेश में अच्छे स्थान पर है। पुरुष नसबंदी को लेकर प्राप्त 392 के लक्ष्य के विपरीत 905 पुरुषों के नसबंदी ऑपरेशन करवाए जा चुके हैं।

जागरूकता के लिए अभियान

एएसओ श्रद्धा सिंह के अनुसार पुरुष व महिला नसबंदी को लेकर पिछले माह में अभियान के तहत शिविरों के आयोजन किए गए। अभियान के तहत जागरुकता गतिविधियां की गई। मैदानी कार्यकर्ताओं ने स्थाई, अस्थाई गर्भनिरोधक के उपयोगकर्ताओं को चिन्हित करना एवं हितग्राहियों को जागरूक करने के लिए जनप्रतिनिधियों, समाजसेवी, धर्मगुरुओं आदि का सहयोग लेकर परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी को बढ़ावा देने कार्यक्रम किए गए। हालाकि सिंह ने माना कि पिछले वर्ष की तुलना में आंकड़ों में कमी आई। इसके पीछे का करण वे महिला चिकित्सक के निलंबन को बतातीं है। सिंह के अनुसार डॉ गीता बारमाटे के निलंबन के कारण शिविर नहीं लग पाए हैं और लक्ष्य पूर्ती नहीं की जा सकी है।

लगता है कम समय

एएसओ श्रद्धा सिंह ने बताया कि पुरुष नसबंदी बहुत ही आसान व सरल बिना चीरा, टांका दर्द रहित पद्धति है। जिसमें नसबंदी करने में मात्र 5 से 10 मिनिट का समय लगता है। पुरुष को भर्ती होने की भी आवश्यकता नहीं होती है और नसबंदी के बाद पुरुष अपने घर जा सकते हैं। इसमें किसी प्रकार की कोई कमजोरी नहीं होती है। महिला नसबंदी की अपेक्षा पुरुष नसबंदी बहुत ही आसान है। पुरुष नसबंदी कराने पर 3 हजार और प्रेरक को 400 रुपए मिलते हैं।
वर्सन
आंकड़ों के हिसाब से भले ही महिलाओं के नसबंदी कराने के आंकड़े अधिक है। लेकिन हमारा जिला पुरुष नसबंदी के मामले में प्रदेश में अच्छे स्थान पर है। एक महिला चिकित्सक के निलंबित रहने के कारण इस बार कम ऑपरेशन हो पाए हैं।
श्रद्धा सिंह, एएसओ स्वास्थ्य विभाग