
नहलेसरा-जमुनिया जलाशय खाली
कटंगी। क्षेत्र बीते 3 वर्षो से अल्पवर्षा का सामना कर रहा है। इस वर्ष भी आधा मानसून सत्र बीतने के बाद महज 312 मिलीमीटर वर्षा ही हो पाई है। एक पखवाड़े से धरती प्यासी है। बारिश के अभाव में जलस्त्रोत सूख रहे हैं। नहलेसरा तथा जमुनिया जलाशय खाली पड़े हैं। वर्षा ऋतु की शुरूआत में जलाशयों में जो जल संग्रहित हुआ था, उसे भी हाल के दिनों में किसानों के भारी दबाव के चलते धान की रोपाई के लिए दिया जा रहा है। बहरहाल, अगर ऐसे ही हालात रहे तो गर्मी के दिनों में मवेशियों तथा मत्स्य पालन के लिए जलाशयों में पानी की एक बूंद भी नहीं बचेगी। इस विकट घड़ी में सभी को बारिश का बड़ी बेसब्री से इंतजार है। अब बारिश के लिए लोग धार्मिक अनुष्ठान अखंड रामायण का पाठ तक करने लगे हैं।
विभागीय जानकारी अनुसार नहलेसरा जलाशय की जल संग्रहण क्षमता 14.526 मिलीयन घन मीटर है। जलाशय में करीब 37 फीट जल संग्रहित किया जाता है। इस वर्ष जलाशय में 18 फीट जल संग्रहित हुआ था। लेकिन किसानों को पानी देने के बाद अब जलाशय में मात्र 10 फीट पानी रह गया है और किसानों को लगातार पानी दिया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि नहलेसरा जलाशय में करीब 8 वर्षो से पर्याप्त मात्रा में जल संग्रहित नहीं हो पाया है। 5 सालों से ओवरफ्लो वाल (रपटा) को पानी ने छुआ तक नहीं है। यहीं हाल जमुनिया जलाशय का भी है। इस जलाशय की जल संग्रहण क्षमता 9.197 मिलीयन घन मीटर है। इसमें 25 फीट जल संग्रहण किया जाता है। 18 फीट जल संग्रहित हो चुका था। लेकिन बारिश के अभाव में किसानों को जलाशय से पानी दिया गया। यहां भी मात्र चंद फीट ही पानी रह गया है।
सूखने की कगार पर जलाशय
बताया गया कि इन जलाशयों में ज्यादातर पानी मानसून के दौरान ही आता है। इस वर्ष अब तक बारिश नहीं होने की वजह से यह जलाशय सुखने की कगार पर आ खड़े हैं। इनमें क्षमता के अनुरूप आधा पानी जमा नहीं हो पाया। दूसरी तरफ अभी बारिश की कोई खास उम्मीद दिखाई नहीं दे रही है। क्षेत्र में इस वर्ष बहुत कम बारिश हुई है। तमाम इलाकों में पेयजल संकट भी दिखाई दे रहा है। वहीं तापमान भी दिन-ब-दिन बढ़ते ही जा रहा है। जिससे पानी का संकट और प्रबल होने के आसार समझ आ रहे हैं।
नहीं लगी रोपणी, चिंता में किसान
बारिश की बेरुखी और बांधों की बदहाली से सबसे ज्यादा किसान चिंतित हैं। यह खरीफ की बुवाई का समय है। लेकिन कई गांवों में खेत सूखे हुए है। पहली बारिश के बाद जिन किसानों की बुआई की थी वह रोपणी सूखने की कगार पर है। मानसूनी मौसम का एक माह ऐसे ही बीत चुका है और सावन के पहले सप्ताह में भी मानसून मेहरबान नहीं है। नहलेसरा और जमुनिया बांध सूखे पड़े हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा चिंता और तनाव किसानों के चेहरों पर हैं। उनके खेतों को न बारिश का पानी मिल रहा है और ना नहरों से छोड़ा गया पानी अब तक अंतिम छोर तक पहुंचा है। ज्ञात हो कि जुलाई की शुरुआत में ही बारिश से बांध उफना जाते रहे हैं। नहरों को पानी भरपूर मिलने लगता था, लेकिन करीब 3 सालों से क्षेत्र में सूखे जैसे हालत बन रहे है।
इनका कहना है।
बारिश के अभाव में पर्याप्त जल संग्रहण नहीं हो पाया शुरूआती समय में बारिश के बाद जो पानी जमा हुआ था वह किसानों को धान की रोपाइ के लिए दिया जा रहा है.
घनश्याम मड़ावी, एसडीओ जल संसाधन विभाग
Published on:
08 Aug 2018 08:52 pm
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