
संदीप की गिरफ्तारी, संतोष की मौत के बाद हताश हुए नक्सली
बालाघाट. हार्डकोर इनामी नक्सली संदीप कुंजाम की गिरफ्तारी और एसीएम सुभाष की मौत से हताश हुए नक्सली अपनी खोई हुई जमीन को तलाश रहे हैं। जिले में नक्सलियों की पकड़ लगातार ढीली होते जा रही है। इधर, १० अगस्त को जिले के बहेला थाना क्षेत्र के खराड़ी-कंदला के जंगल में हुई नक्सलियों और पुलिस के बीच हुई मुठभेड़ में एक नक्सली के मारे जाने की पुष्टि स्वयं नक्सली दलम ने की है। नक्सलियों द्वारा फेेंके गए पर्चे में इसका उल्लेख भी किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि जिले में नक्सलियों की हलचल तो है, लेकिन वे पूर्ववत स्थिति में नहीं है। जनता के बीच नक्सलियों का खौफ कम हो रहा है। वहीं नक्सली अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए जमीन तलाश रहे हैं। हालांकि, नक्सलियों के मंसूबों को नाकाम करने के लिए पुलिस लगातार जंगलों में सर्चिंग कर रही है।
जानकारी के अनुसार हाल ही में नक्सलियों ने देवरबेली चौकी क्षेत्र के अंतर्गत भावे के जंगल में पर्चा फेंका था, जिसे पुलिस ने जब्त भी किया था। इस पर्चे के माध्यम से महाराष्ट्र, छग और मप्र स्पेशल जोनल कमेटी ने स्वीकार किया है कि १० अगस्त को पुलिस मुठभेड़ में एसीएम सुभाष की मौत हुई है। इसके अलावा जुलाई २०१९ में मलाजखंड दलम के मंगेश, नंदा के भी शहीद होने का उल्लेख किया गया है। इसी तरह शारदा, शोभा, सावित्री के बोरबन के जंगल में मौत होने का जिक्र किया गया है। इस तरह से नक्सली दलम द्वारा पर्चा जारी कर अपनी हताशा को प्रकट किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि जिले में नक्सलियों की पकड़ कमजोर हो रही है। इधर, पुलिस लगातार नक्सलियों के मंसूबों को विफल करने के लिए सर्चिंग कर रही है। जंगलों में अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। छग, महाराष्ट्र राज्य की सीमा से लगे क्षेत्रों में सघन सर्चिंग की जा रही है। ताकि नक्सली किसी भी तरह से अपने मंसूबों में कामयाब न होने पाए। उल्लेखनीय है कि संदीप कुंजाम को गिरफ्तार करने से पूर्व पुलिस ने वर्ष २०१८ में हार्डकोर नक्सली मुन्नालाल वरकड़े, संगम सदस्य इंदल पंद्रे, मार्च २०२१ में हार्डकोर नक्सली श्यामलाल उर्फ मोतीराम सनकू जांगधुर्वे को भी गिरफ्तार कर चुकी है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में पैठ जमाने की कोशिश
नक्सलियों ने खासतौर पर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों पर अपनी पैठ जमाने की कोशिश की है। महाराष्ट्र्र और छग राज्य की सीमा से लगे क्षेत्रों में नक्सलियों की चहलकदमी अधिक है। दरअसल, इन सीमावर्ती क्षेत्रों में सघन वन होने के कारण वे आसानी से जिले में प्रवेश कर जाते हैं, लेकिन अपने मंसूबों पर कामयाब नहीं हो पाते। हालांकि, नक्सलियों ने पूर्व में जिले के कान्हा नेशनल पार्क, दक्षिण बैहर, किरनापुर, लांजी क्षेत्र में सक्रियता बढ़ाने की कोशिशें की थी, लेकिन लगातार पुलिस की सर्चिंग और सक्रियता के चलते वे अपने मंसूबों पर कामयाब नहीं हो पाए हैं। विदित हो कि जिले के रुपझर, बैहर, मलाजखंड, बिरसा, लांजी, किरनापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत बिठली, सोनगुड्डा, डाबरी, सालेटेकरी, चौरिया, चिलौरा, चिलकोना, राशिमेटा, दड़कसा, डाबरी, पितकोना, कोद्दापार, कोरका, बोंदारी, अडोरी, नवी, जगला, जालदा, हर्राडीह, खमारडीह, सायर संदुका, टेमनी, गढ़ी सहित अन्य क्षेत्रों में नक्सली लगातार मूवमेंट कर रहे हैं।
इनका कहना है
जिले में नक्सलियों का मूवमेंट बना हुआ है। खासतौर पर गढ़ी, बैहर, बिरसा, मलाजखंड, लांजी थाना क्षेत्र में नक्सलियों की मौजूदगी है। नक्सलियों के मंसूबों को नाकाम करने के लिए पुलिस लगातार सर्चिंग कर रही है। नक्सलियों के विरुद्ध पुलिस को अनेक सफलताएं भी मिली है।
-अभिषेक तिवारी, एसपी, बालाघाट
Published on:
01 Sept 2021 10:49 pm
बड़ी खबरें
View Allबालाघाट
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
