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दानपट्टे की सरकारी जमीन पर हो रही खरीदी-बिक्री

शिकायतकर्ता ने दिया सुझाव रिक्त भूमि में बने न्यायालय

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दानपट्टे की सरकारी जमीन पर हो रही खरीदी-बिक्री

दानपट्टे की सरकारी जमीन पर हो रही खरीदी-बिक्री

बालाघाट/कटंगी। शहर के बड़े तालाब के नजदीक कई सालों पहले छोटेलाल मिश्रा को कृषि कार्य के लिए सरकार द्वारा दानपट्टे पर दी गई 210638 वर्गफीट यानी 4.835 हेक्टेयर भूमि को टुकड़ों में बेचा जा रहा है। दान की इस जमीन के एक हिस्से को बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति लिए पहले ही बेचा जा चुका है और अब शेष हिस्से को भी बेचने और निर्माण की तैयारी चल रही है। सरकार इस तरफ ध्यान दे और उचित कार्रवाई कर सरकारी जमीन का सदुपयोग करें, इस तरह का पत्र व्यवहार अवधबिहारी त्रिवेद्वी ने प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय सहित विभाग के बड़े तमाम अफसरों से किया था। इसके बाद शुक्रवार को अनुविभागीय अधिकारी बालाघाट केसी बोपचे और एसडीएम कटंगी रोहित बम्होरे ने राजस्व अमले के साथ तालाब के पास की सरकारी भूमि का निरीक्षण किया है। इस दौरान शिकायतकर्ता अवधबिहारी त्रिवेद्वी ने उक्त सरकारी भूमि पर व्यवहार न्यायालय की इमारत के निर्माण करने का सुझाव दिया है।
गौरतलब हो कि काफी लंबे समय से न्यायालय के लिए सरकारी जमीन तलाश रही है। अभी हाल ही में कटंगी मुख्यालय से 6 किमी. दूर स्थल का चयन किया गया है। ऐसे में अवधबिहारी त्रिवेद्वी ने रिक्त भूमि पर व्यवहार न्यायालय भवन के निर्माण का सुझाव दिया है। जिसे अधिकारियों ने उचित बताया है और सरकार को इस संबंध में अवगत कराने की बात भी कही है।
उल्लेखनीय है कि किसी भी सरकारी भूमि जो दानपट्टे में दी गई है, उसे बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति लिए बेचा नहीं जा सकता। लेकिन छोटेलाल मिश्रा को दान में मिली जमीन को उनके वंशजों के द्वारा बेचा जा चुका है। जबकि कुछ अभी भी उसमें कृषि कार्य कर रहे हैं। शिकायतकर्ता ने बताया कि दान की उक्त जमीन के एक हिस्से (36370 वर्गफीट) की 29 अगस्त 1979 में खरीदी बिक्री हुई है। वहीं अब शेष हिस्से को भी प्लाटिंग कर बेचने की तैयारी की जा रही है। वह बताते हंै कि राजस्व पुस्तक परिपत्र खंड 4 में स्पष्ट है कि पट्टेधारी की भूमि किसी को विक्रया अथवा हस्तातरण करने का अधिकार नहीं होगा। लेकिन इस नियम का उल्लंंन करते हुए जमीन की खरीदी बिक्री की गई। बहरहाल, यह मामल अब शासन और प्रशासन दोनों की जानकारी में आया है, अब प्रशासन इस सरकारी भूमि की अवैध तरीके से खरीदी बिक्री करने वालों के खिलाफ कैसी कार्रवाई करेगा यह प्रशासन तय करेगा। फिलहाल जो जमीन छोटेलाल मिश्रा को दान में दी गई है, उसके एक हिस्से पर कई सालों से खेती तक नहीं हो रही है मतलब जमीन खाली पड़ी है। इसी जमीन खरीदी बिक्री और प्लाटिंग करने की योजना बनाए जाने की चर्चाएं सामने आ रही है।

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