4 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पति की दीर्घायु के लिए महिलाओं ने रखा निर्जल व्रत

चलनी में चांद और पति के चेहरे का किया दीदार राम मंदिर सहित विभिन्न वार्डो में की गई मॉ करवा की सामुहिक पूजा विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के किए गए आयोजन

2 min read
Google source verification
चलनी में चांद और पति के चेहरे का किया दीदार

चलनी में चांद और पति के चेहरे का किया दीदार

बालाघाट. अखंड सौभाग्य का महापर्व करवाचौथ 20 अक्टूबर को जिला मुख्यालय सहित अन्य ग्रामीण अंचलों में धार्मिक मान्यताओं के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु के लिए निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव, पार्वती, कार्तिकेय और भगवान गणेश सहित चंद्रमा की विशेष पूजा-अर्चना की। महिलाओ ने सोलह श्रृंगार कर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। विभिन्न स्थानों पर सामुहिक रूप से माता करवा की कथा का वाचन कर मॉ करवा की विशेष आराधना की गई। रात को चंद्रोदय के बाद चलनी में चांद और अपने सुहाग के चेहरे का दीदार कर पति के हाथों जल ग्रहण कर महिलाओं ने व्रत खोला।
शहर की महिलाओं में पर्व को लेकर खासा उत्साह देखा गया। महिलाओं ने निर्जला व्रत कर पूरे दिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए। शाम के वक्त सोलह श्रृंगार कर शहर के राम मंदिर सहित विभिन्न वार्डो में सामुहिक धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। माता करवा की कथा सुनकर, मां करवा की सामूहिक आरती उतारी, पूजा पाठ में भाग लिया। देर शाम चलनी में चांद और पति का एक साथ दीदार कर पति के हाथों जल ग्रहण कर करवा चौथ का व्रत पूरा किया।
इसलिए रखा जाता है व्रत
चर्चा के दौरान सुहागिन महिलाओं ने बताया की करवा चौथ का व्रत पति की दीर्घायु और सुख समृद्धि के लिए रखा जाता है। ताकि परिवार में हमेशा सुख समृद्धि बनी रहे और पति दीर्घायु हो। सुबह उठकर जल ग्रहण करते हैं फिर पूरा दिन निर्जला रहते हैं। पूरे दिन व्रत धारी महिलाएं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर मां करवा सहित अन्य देवी-देवताओं की विशेष पूजा अर्चना करती है। उन्होंने आगे बताया कि इस व्रत को रखने से पति पत्नी के बीच प्रेम में वृद्धि होती है। पति पत्नी दोनों ही इस व्रत का सम्मान करते हैं। रात को जब पति देव घर आते हैं। तब चंद्रमा का दीदार कर उनके हाथों से जल ग्रहण करते हैं।