बालोद

आदिवासी इलाके की पहचान बना ये Digital स्कूल, स्मार्ट स्टडी के सामने शहर के नामी स्कूल भी फेल

शासकीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक शाला ग्राम ठेमाबुजुर्ग जिलेभर के स्कूलों के लिए मॉडल बना हुआ है।

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Jan 22, 2018

डौंडी/बालोद. शासकीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक शाला ग्राम ठेमाबुजुर्ग जिलेभर के स्कूलों के लिए मॉडल बना हुआ है। जहां स्कूली बच्चों के साथ शाला भवन व पेड़-पौधों में भी अनुशासन झलकता है। यहां पठन-पाठन आज के माहौल के साथ मॉर्डन तरीके से व खुशनुमा माहौल में मनोरंजनक, ज्ञानर्धक तरीके से कराया जाता है।

ऐसे माहौल में पढ़ाई के लिए प्रतिदिन स्कूल आने के लिए सभी छात्र-छात्राएं ललाइत रहते हैं। इसका बड़ा कारण बच्चों को पढ़ाई के प्रति रूचि पैदा करने नए-नए तरीकों के साथ डिजिटल शिक्षा को अपनाना है। यहां खेलकूद के साथ शारीरिक विकास पर भी ध्यान दिया जाता है। उनकी कला प्रतिभा को भी मनोरंजक तरीके से सामने लाने अवसर दिया जाता है। वहीं दूसरी ओर जल प्रबंधन पर भी स्कूल में पूरा ध्यान दिया जा रहा है। मध्याह्न भोजन के लिए हरी ताजी सब्जियां भी यहीं उगाई जा रही है।

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विद्यालय के शिक्षकों के अनुसार बच्चों की पढ़ाई के साथ उन्हें जमीन से भी जोडऩे का प्रयास किया जा रहा है। डिजिटल पढ़ाई के साथ शारीरिक मेहनत के लिए स्कूल परिसर में सब्जियां उगाई जाती है। पेड़-पौधों की देख-रेख के तरीके बताए जाते हैं। शिक्षकों ने बताया स्कूल परिसर में छात्र-छात्राओं में पेयजल की उचित व्यवस्था कैसे की जाए इस पर वोट करा कर पानी टंकी के माध्यम से पीने व पेड़-पौधों सहित सब्जियों तक बेकार पानी पहुंचे इसकी व्यवस्था की गई है। मध्याह्न भोजन के दौरान हाथ धुलाई, विद्यालय के शौचालय में नल से जल की आपूर्ति की व्यवस्था की गई है।

इस जल से शाला के प्रांगण में ही हरि सब्जियां उगाई जाती है। इन सब्जियों का उपयोग मध्याह्न भोजन बनाने में किया जाता है। वहीं स्कूल परिसर में लगे पेड़-पौधों की प्रत्येक सप्ताह शिक्षकों के सा मिलकर छात्र-छात्राएं देखरेख करने के साथ बागवानी करते हैं। कक्षा छठवीं की छात्रा यमुना के अनुसार पढ़ाई के लिए शाला आने में अच्छा लगता है। सभी शिक्षक पढ़ाई के साथ खेल-कूद भी सिखाते हंै। कक्षा सातवीं की छात्रा के स्नेहा के अनुसार हमारे द्वारा उगाई सब्जियों को मध्याह्न भोजन में उपयोग किया जाता है, तो बहुत अच्छा महसूस
होता है।

कक्षा आठवीं की छात्रा ओमकार ने कहा मुझे टीवी देख कर उसके अनुसार पढ़ाई करने में मजा आता है, इससे मुझे विषय जल्दी याद होते हंै। कक्षा आठवीं का छात्र सेवा राम ने बताया यहां पढ़ाई के साथ खेल-कूद व व्यायाम कराने के साथ विज्ञान के मॉडल बनाने मेें शिक्षक मदद करते हंै।

इधर शासन की योजना अनुसार स्कूल में स्मार्ट क्लॉस की व्यवस्था की गई है, जहां छात्र-छात्राओं को नई तकनीक से डिजिटल पढ़ाई करवाई जाती है। जहां छोटे बच्चे प्रतिदिन रूचि के साथ कक्षा में पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं। शिक्षक भी सामंजस्य के साथ मिलकर बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार प्रयास कर रहे हंै। विद्यालय लगने के प्रथम दिन से ही छात्र-छात्राओं को खेल-कूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, विज्ञान के मॉडल तैयार करने के साथ अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने के लिए शिक्षक प्रेरित करते

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Published on:
22 Jan 2018 12:08 pm
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