
बालोद. जिला मुख्यालय की जीवनदायनी तांदुला नदी में फैली जलकुंभी को जड़ सहित नष्ट करने व उसमें से गाद निकालने के लिए शासन-प्रशासन अभी तक कोई निर्णय नहीं ले पाया है। मामले में जिला प्रशासन ने नदी को वैज्ञानिक तरीके से व्यवस्थित करने हामी भरी थी। इसके लिए रायपुर से पर्यावरण वैज्ञानिक की टीम बुलाने की बात कही थी, पर अभी तक योजना पर अमल नहीं दिख रहा है। इधर जन सहयोग से अब तक लगभग 90 ट्रक जलकुंभी नदी से निकाली जा चूकी है। बताया जाता है कि जलकुम्भी से खाद भी बनाया जा सकता है, पर नदी में फैली जलकुम्भी को तो जन सहयोग से निकाल रहे हैं, पर निकाली गई जलकुम्भी के सदुपयोग पर अभी तक किसी ने कोई पहल नहीं की है।
नदी में तैरने लगी है मछलियां
बता दें कि तांदुला नदी जलकुम्भी से पटी हुई है। जन सहयोग से जलकुम्भी निकालने का काम २३ दिनों से लगातार जारी है। नदी की सफाई करने वाले कृष्णा दुबे, नरोत्तम साहू, विमल साहू, प्रशांत पवार ने बताया तांदुला नदी पूरी तरह जलकुंभी से पटी हुई थी। जलकुम्भी के कारण सूरज की किरणें नदी के पानी तक नहीं पहुचत पाती थी। ऐसे में मछलियों के पनपने के लिए जगह नही मिलती थी। इस वजह से रामघाट क्षेत्र में मछलियां नहीं थी, पर अब सफाई के बाद नदीं में मछलियां तैरती दिखने लगी है।
पांच साल से नहीं आई बाढ़, विभाग को है इसका इंताजार
नदी मामले में जिले के सिंचाई विभाग का कहना है नदी सफाई के लिए उनके पास कोई फंड नहीं है। विभाग का कहना है यहां बाढ़ आने पर उसी में जलकुम्भी बह जाएगी। पर विभाग को बता दें कि बीते 5 साल में यहां बाढ़ नहीं आ पाई है। ऐसी स्थिति का इंतजार करेंगे तो नदी पूरी तरह अपना अस्तित्व खो देगी। तांदुला नदी की सफाई जन सहयोग से बीते 23 दिनों से चल रहा है। अभी तक शासन-प्रशासन ने नदी की स्थिति देखने नहीं आया। नदी की सफाई में लगातार लगे लोगों ने कहा जिला प्रशासन जब योजना बनाएगा तब बनाए, पर अभी नदी की सफाई बहुत जरुरी है। राम घाट भी विलुप्त होने की स्थिति में था पर उसे बचाने युवा लगे हुए हैं, क्योंकि हीरापुर का घाट तो लगभग अपना अस्तित्व ही खो दिया है।
Published on:
24 Apr 2018 10:04 am
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