
मनरेगा से जीवनदायिनी तादुंला नदी को मिलेगा नया जीवन
बालोद. जिला मुख्यालय की जीवनदायिनी नदी की सफाई व संरक्षण की पहल की उम्मीद जगी है। अब मनरेगा के माध्यम से इसमें जल संरक्षण की पहल की जाएगी। मनरेगा विभाग ने नदी व्यवस्थित करने के लिए नदी से लगे ग्राम पंचायत हीरापुर और सिवनी के सरपंच को नदी सफाई के लिए प्रस्ताव मंगाया है। इसके लिए दोनों पंचायतों के सरपंचों ने प्रक्रिया शुरू कर दिए हैं।
लाखों लोगों की प्यास बुझती है
बता दें कि तांदुला नदी के किनारे बसे बालोद नगर सहित सौ से अधिक गांव बसे हुए हैं। नदी के कारण ही यहां के पानी से लाखों लोगों की प्यास बुझती है। पर एक दशक से इस नदी की उपेक्षा के कारण वर्तमान में इसकी स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। तली में रेत-मिट्टी के गाद और जलकुंभी ने नदी की सांसें रोक दी हैं।
मनरेगा में रोजगार के साथ नदी को मिलेगा नया जीवन
बता दें कि तांदुला नदी पूरी तरह जलकुंभी व गन्दगी से पट गई है। जल संरक्षण और नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए नदी की सफाई बहुत जरुरी हो चुकी है। नदी को ऐसे ही छोड़ दिया जाए, तो तांदुला पूरी तरह खत्म हो जाएगी। पर अब मनरेगा के माध्यम से नदी को व्यवस्थित करने की पहल मनरेगा विभाग द्वारा की जा रही है। इसके तहत ग्राम पंचायत सिवनी और हीरापुर से प्रस्ताव मंगाया गया है। दोनों के सरपंच शीघ्र ही नदी सफाई के लिए प्रस्ताव बनाकर आवेदन सौंपेंगे। इससे मनरेगा के तहत नदी सफाई से एकओर ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा, तो वहीं नदी का संरक्षण भी होगा।
रामघाट का इलाका हुआ जलकुंभी से मुक्त
ज्ञात रहे कि पत्रिका के अमृतम् जलम् के तहत मार्च २०१८ से नदी सफाई का अभियान जारी है। नगर के कृष्णा दुबे के साथ 10 युवा एक संकल्प के साथ तांदुला नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए वहां से गन्दगी निकालने के लिए 62 दिनों से नदी के राम घाट इलाके में उतरते हैं। सफाई का ऐसा जुनुन कि अल सुबह से मेहनत कर राम घाट का हिस्सा लगभग साफ़ कर चुके हैं। एक मिशाल पेश कर लोगों को यह बताया कि हमारे जीवन में नदी-नालों का क्या महत्व है। अगर प्राकृतिक जल स्रोत ही खत्म हो जाएंगे तो आने वाला भविष्य और परेशानी भरी हो सकती है। पर अब हीरापुर घाट और सिवनी केवट घाट का भी सफाई करने मनरेगा अधिकारी ने दोनों ग्राम पंचायत से प्रस्ताव मंगाए हंै।
प्राकृतिक संसाधनों को बचाने की है प्राथमिकता
बता दें कि केंद्र सरकार ने मनरेगा को अब पूरी तरह परिवर्तन कर दिया है। केंद्र ने मनरेगा के तहत प्राकृतिक संसाधनों को बचाने सबसे ज्यादा प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत नदी, नाले, कुंआ, डबरी, तालाब आदि जल स्रोतों सहित अनेक कार्य जो प्राकृतिक संसाधन हैं जहां जल संरक्षण हो सकता है काम किए जाएंगे। जानकारी के मुताबिक मनरेगा में 155 प्रकार के कार्यों में सबसे ज्यादा 100 प्रकार के काम जल संरक्षण व प्राकृतिक संसाधनों पर केंद्रित है। मनरेगा अधिकारी ने ममले में भरोसा दिलाया है कि नदी की सफाई मनरेगा से भी किया जा सकता है।
Published on:
08 Jun 2018 10:05 am
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