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गाय पाल नहीं सकते तो ले आएं पाटेश्वर धाम, हम देंगे कमाकर

जामड़ी पाटेश्वर धाम में हुए गौ भक्त सम्मेलन में उपस्थित विशाल जन समुदाय को संबोधित करते रामबालक दास ने कहा कि गौ माताओं की रक्षा करने

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Shankar Sharma

Nov 26, 2015

Balod photo

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डौंडीलोहारा.
जामड़ी पाटेश्वर धाम में हुए गौ भक्त सम्मेलन में उपस्थित विशाल जन समुदाय को संबोधित करते रामबालक दास ने कहा कि गौ माताओं की रक्षा करने व उन्हें कसाई खाने से बचाने वाले यदि उन गायों को पाल नहीं सकते तो उन्हें पाटेश्वरधाम स्थित गौशाला में लाकर छोड़ सकते हैं। यहां पाटेश्वरधाम परिवार द्वारा उन गौमाताओं को तंदुरूस्त कर उनसे होने वाली आय गाय के मालिक को दे दी जाएगी।


तहसील मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर वनांचल क्षेत्र के घने जंगलों व पहाड़ों के बीच जामड़ी पाटेश्वर धाम में बुधवार को दोपहर दो बजे दीपावली मिलन समारोह, संकीर्तन महोत्सव व विराट गौभक्त सम्मलेन का आयोजन किया गया। समारोह में हजारों भक्तों की उपस्थिति रही।

गौ रक्षकों का किया जाएगा सहयोग
कलक्टर राजेश राणा ने कहा पाटेश्वरधाम परिवार द्वारा उन गौभक्तों को जिन्होंने हजारों गौमाताओं को बूचडख़ानों तक ले जाए जाने से बचाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका सम्मान करने की जो परंपरा प्रारंभ शुरू की है वह सराहनीय है। प्रशासन द्वारा गौमाताओं की रक्षा करने व उन्हें कसाइयों के चंगुल से बचाने वाले गौरक्षकों को किसी भी प्रकार की प्रशासनिक सहायता की आवश्यकता होगी, उसे हम हरसंभव प्रदान करने का प्रयास करेंगे।

महाराष्ट्र में बिकता है सबसे अधिक मांस
साध्वी सरस्वती दीदी ने कहा जिस राज्य में संत भूखा रहता है वहां यज्ञ सफल नहीं होता। इस भूमि में रहकर गौ माताओं की रक्षा करना है। छत्तीसगढ़ की धरती से गौहत्या बंद करने की बात उन्होंने कही। साध्वी ने कहा कि आज महाराष्ट्र में गौहत्या पर प्रतिबंध है, लेकिन सबसे अधिक गायों का मांस वहीं बिकता है। उन्होंने कहा कि हमारी सगी मां तो हमें सिर्फ तीन या चार साल ही अपना दूध पिलाती है, लेकिन गौमाता तो सारी उम्र हमें अपना दूध पिलाती है। कानून बनाकर उसे तोड़ देने की परंपरा से आगे नहीं
बढ़ सकते।

आवश्यकता है गौ सेवकों की
उन्होंने कहा कि हमारी गौ माता की ओर आंख उठाकर देखे तो उसकी आंखे निकाल दी जानी चाहिए। जो उनकी रक्षा करने वाले ऐसे गौसेवकों की आवश्यकता है। आजकल 15 अगस्त व 26 जनवरी को गीतों के माध्यम से इतिश्री कर ली जाती है। हमारी माताएं इस भारत भूमि का गौरव है। हमें उनकी रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहने की जरूरत है।