
कृषि वैज्ञानिकों ने तैयार किया 12 माह का कैलेंडर, हर मौसम में किसान उगा सकेंगे सब्जी
भाटापारा (सूरजपुरा). राज्य शासन की महत्वपूर्ण योजना नरवा, घुरवा, गरुवा और बाड़ी पर सबसे अलग हटकर कृषि वैज्ञानिकों ने अपने स्तर पर बाड़ी पर अपना ध्यान लगाना शुरू कर दिया है। उसने पूरे साल का कैलेंडर बनाते हुए किसानों तक पहुंचाने का काम भी चालू कर दिया है। जनवरी से लेकर दिसंबर तक के पूरे 12 माह के इस कैलेंडर पर यदि काम किया जाए तो सालभर के लिए हर मौसम में तैयार होने वाली सब्जी और फल मिलेगा। साथ ही बची हुई सामग्री बेचने के बाद अतिरिक्त आय भी हासिल होगी।
वैसे तो कृषि वैज्ञानिकों की टीम पूरे साल अनुसंधान करती हैं। सफलता भी हासिल कर ली है। पर बैरिस्टर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र ने राज्य शासन की इस महत्वपूर्ण योजना में काम करते हुए पूरे 12 माह का कैलेंडर तैयार किया है। इस पर अमल किए जाने से किसानों के साथ-साथ घर के आंगन या बाड़ी में आसानी से सब्जी की खेती की जा सकेगी। याने अब सब्जी या फल की खरीद पर होने वाला खर्च से पूरी तरह मुक्ति मिलेगी।
फलदार पौधों के रोपण के लिए सबसे उपयुक्त माह जून के अंत में। इस माह कम अवधि में तैयार होने वाले फलदार पौधों का रोपण किया जा सकता है। फलदार पौधे इसी माह में लगाने होंगे।
हर माह टीसीबी एग्री एंड रिसर्च सेंटर बिलासपुर ने पूरे साल का जो कैलेंडर तैयार किया है उसके मुताबिक जनवरी में तरबूज, मूली, धनिया, पत्ता गोभी, भिंडी, कुमड़ा, ककड़ी, करेला और भाजी लगाई जा सकती। अगले माह याने फरवरी में भिंडी, बैंगन, चौलाई, करेला, परवल, कुंदरु और ग्वारफल्ली की खेती की जा सकती। यह सभी मार्च में तैयार होगी। अप्रैल माह में भिंडी, करेला, कुमड़ा, परवल और पत्तागोभी की बोनी करें। इसकी फसल मई माह में मिलेगी। जून माह में बाडी में लौकी, तोरई, भिंडी, अरबी, सेमी, करेला, टमाटर, भुट्टा, मूंगफली और फलदार पौधों के रोपण के लिए काम करना होगा। जुलाई माह में खरीफ सत्र की तैयारी प्याज, बैगन, शकरकंद, धनिया, अदरक, केला, गाजर और शलजम लगाई जा सकेगी।
सितंबर माह में टमाटर, चुकंदर, फूलगोभी, परवल और आलू की खेती के लिए उपयुक्त होगा। अक्टूबर माह में मटर, बैगन, फूलगोभी, पत्तागोभी, गाजर, आलू, मेथी, पालक, चौलाई, शकंदर, शलजम, हरी प्याज, मिर्च, टमाटर और पत्तियों वाली सब्जी की बोनी फायदेजनक होगी। नवंबर माह में मटर, मूली, शलजम, पत्तागोभी, धनिया, हरी सब्जियां और प्याज के लिए उचित माह माना गया है। दिसंबर माह में हरी सब्जी और मूली के बाद फलदार पौधे लगाए जा सकेंगे।
बाड़ी का उपयोग निश्चित रूप से फूलों की खेती के लिए से भिन्न होता है। लेकिन इतना तो तय है कि पूरे 12 माह इससे हरियाली आएगी और बढ़ते हुए प्रदूषण को रोका जा सकेगा। इस काम से सब्जी की घरेलू आपूर्ति बेहद कम लागत में हासिल की जा सकेगी और प्राकृतिक रूप से ताजा सब्जियां मिलेंगी।
बाड़ी में लगाई गई सब्जियों को काटे जाने के बाद निकलने वाले अवशेष याने इनके छिलके और डंठल बेकार पत्तियां एकत्रित कर इससे खाद बनाई जा सकती है। यह खाद घर की ही बाड़ी में प्राकृतिक खाद के रूप में उपयोग किया सकता हैं। याने खाद खरीदने के खर्च से पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा।
साइंटिस्ट, वानिकी एवं प्रसार अधिकारी, टीसीबी एग्री कॉलेज एंड रिसर्च स्टेशन, बिलासपुर
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Published on:
09 May 2019 05:06 pm
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