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POLICE ने शुरु में ही सही जांच की होती तो अब तक JAIL में होते असली गुनहगार

दो माह पूर्व नगर के वार्ड क्रमांक 13 में किशोरी की संदिग्ध अवस्था में हुई मौत के मामले की जांच करने पहुंचीं बाल आयोग की अध्यक्ष, कहा-पूरे प्रकरण में संदिग्ध है पुलिस की भूमिका

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Pranayraj rana

May 01, 2016

inspection in well

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रामानुजगंज.
बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष शताब्दी सुबोध पांडेय शनिवार को किशोरी की मौत के जांच के सिलसिले में नगर में पहुंची। उन्होंने रेस्ट हाउस में किशोरी के पिता व संबंधित लोगों का बयान लेने के बाद थाना प्रभारी से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। इसके बाद घटनास्थल का भी निरीक्षण किया।


पूरे मामले की हर बिंदुओं की जानकारी लेने के बाद शताब्दी पांडेय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस प्रकरण में पुलिस की भूमिका संदिग्ध है। यदि पुलिस सही ढंग सेे जांच कर असली आरोपियों को जेल भेज देती तो यह स्थिति निर्मित न होती।



गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व नगर के वार्ड क्रमांक 13 में एक किशोरी ने 20 फरवरी को उसके साथ अनाचार किए जाने के बाद कथित तौर पर कुएं में कूदकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में परिजन व नगरवासियों ने पुलिस पर जान-बूझकर असली आरोपियों को बचाने का आरोप लगाते हुए क्रमिक भूख हड़ताल शुरु की थी।


इस पर आईजी के निर्देश पर मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया तब जाकर परिजन व नगरवासियों ने भूख हड़ताल समाप्त की थी। इस मामले में शुरू से ही स्थानीय पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसी प्रकरण की जांच के सिलसिले में बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष शताब्दी पांडेय शनिवार को स्थानीय रेस्ट हाउस में पहुंची।


यहां उन्होंने मृतिका के पिता व संबंधित लोगों के बयान लेने के बाद थाना प्रभारी चुन्नू तिग्गा से भी पूछताछ की। फिर उस कुएं का भी जायजा लिया, जहां किशोरी ने आत्महत्या की थी। उन्होंने एसआईटी टीम की प्रमुख मनीषा ठाकुर से भी मोबाइल पर घटना की जांच के संबंध में बातचीत की। इस दौरान उनके साथ नगर पंचायत अध्यक्ष रमन अग्रवाल भी थे।


मुख्यमंत्री को देंगे जांच रिपोर्ट

बाल आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि आयोग एसआईटी की जांच पर पूरी निगरानी रखेगा। साथ ही खुद की जांच रिपोर्ट मुख्यमंत्री को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि किशोरी को न्याय नहीं मिलने पर आयोग कोर्ट भी जाएगा।


डीसीपीओ को लगाई फटकार

आयोग की अध्यक्ष ने डीसीपीओ हारिश अब्दुल्ला से किशोरी की मौत के संबंध में अब तक की कार्रवाई का विवरण मांगा तो वे कुछ भी नहीं बता सके। इस पर उन्होंने डीसीपीओ को फटकार लगाते हुए कहा कि हमारा नैतिक कर्तव्य है कि जब तक पीडि़ता को न्याय नहीं मिल जाए, अंतिम समय तक कोशिश जारी रखें।


समझ से परे है पुलिस की थ्योरी

शताब्दी पांडेय ने बताया कि पूरे मामले में पुलिस की भूमिका स्पष्ट रूप से संदिग्ध रही है। किशोरी के पिता का बयान गलत लिखकर फर्जी हस्ताक्षर कराए गए हैंं। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में पुलिस की बताई गई थ्योरी समझ से परे है। कोई भी लड़की आत्महत्या करने के लिए कम कपड़े क्यों पहनेगी व उसकी मौत महज ढाई-तीन फीट पानी में हो जाए, यह कैसे संभव है। उन्होंने कहा कि मैंने अपने सामने कुएं का पानी नपवाया तो महज 2 फीट पानी ही निकला।

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