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विदेश से दिल्ली में चल रहा था ठगी का खेल, निवेश के नाम पर 3.76 करोड़ रुपये ऐंठे, स्पेशल सेल ने किया पर्दाफाश

Delhi News : दिल्ली-एनसीआर में निवेश के नाम पर ठगी का एक और मामला सामने आया है, जहां ठग विदेश में बैठकर लोगों को निशाना बना रहे थे। स्पेशल सेल की IFSO यूनिट ने इस बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए देश के अलग-अलग राज्यों से अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

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The game of fraud was going on in Delhi from abroad

Delhi News: दिल्ली एनसीआर लगातार निवेश कराने के नाम पर ठगी के मामले सामने आते रहते हैं। अब एक और नया मामला सामने आया है, जिसमें ठग भारत से नहीं बल्कि विदेश में बैठकर दिल्ली में ठगी को अंजाम दे रहे थे। स्पेशल सेल की IFSO यूनिट ने बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बताया कि ये अमीर लोगों को झांसे में लेकर मोटी रकम निवेश के नाम पर लेते थे। पुलिस ने खुलासा करते हुए देश के अलग-अलग राज्यों से अभी तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया है।

आपको बता दें कि यह मामला पुलिस के संज्ञान में पहली बार तब आया जब दिल्ली के एक रियल एस्टेट कारोबारी, कृष्ण कुमार से ऑनलाइन स्टॉक मार्केट निवेश के नाम पर 3.76 करोड़ रुपये ऐंठ लिए गए। पहले तो उन्हें मोटा मुनाफा का ठगों ने लालच दिया फिर उनसे इन्वेस्ट करने के नाम पर पैसे ले लिए। 15 सितंबर 2025 को एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी जांच शुरू की। जांच के दौरान सबसे पहले नवी मुंबई निवासी सबलू कुमार की भूमिका सामने आई, जिसके बैंक खाते में ठगी से जुड़े करीब 10 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इस सुराग के आधार पर पुलिस टीम ने कोटा में दबिश देकर सबलू कुमार को गिरफ्तार किया। उससे की गई गहन पूछताछ में पूरे नेटवर्क की परतें खुलती चली गईं। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने दिल्ली के जंगपुरा इलाके में छापेमारी कर वसीम अहमद, राजेश खान, शाहिद अली और मन्नू इस्सर को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, सभी आरोपी ठगी के इस संगठित गिरोह का हिस्सा थे और अलग-अलग भूमिकाओं में रहकर लोगों से निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये ठगने में शामिल थे।

पुलिस के जांच में खुला राज

इस मामले के तह में जाने पुलिस ने गहन जांच किया तो पता चला कि इस ठगी गिरोह का नेटवर्क बेहद व्यापक और संगठित है। इस मामले में अंतिम गिरफ्तारी द्वारका इलाके से मनीष कुमार की हुई, जो गिरोह के बैंक खातों के संचालन और धनराशि के लेनदेन की अहम जिम्मेदारी संभाल रहा था। पुलिस को मनीष के व्हाट्सएप चैट्स की जांच में ऐसे कई अहम सुराग मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि वह देश के अलग-अलग हिस्सों में दर्ज कम से कम 52 अन्य साइबर ठगी के मामलों से भी जुड़ा रहा है। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने नौ मोबाइल फोन सहित कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे साइबर ठगी सिंडिकेट के पीछे सक्रिय मास्टरमाइंड की पहचान करने और पैसों के अन्य लेनदेन के स्रोतों व नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई हैं।