
बेंगलूरु. आगामी 4 फरवरी की रात एक खतरनाक लघु ग्रह पृथ्वी के निकट से होकर गुजरेगा। हालांकि, इस लघुग्रह के पृथ्वी से टकराने संबंधी अफवाहें, वीडियो क्लिप और खबरें सोशल मीडिया पर चल रही हैं लेकिन यह सही नहीं है। भारतीय ताराभौतिकी संस्थान के प्रोफेसर (सेनि) रमेश कपूर ने बताया कि इस लघु ग्रह के पृथ्वी से टकराने की कोई संभावना नहीं है। प्रोफेसर कपूर ने बताया कि लघु ग्रह 2002 एजे 1290 खतरनाक श्रेणी का लघु ग्रह है जो 4 फरवरी की रात पृथ्वी के बेहद निकट से गुजरेगा। निकटता की यह स्थिति सुबह 3 बजे (5 फरवरी) बनेगी। उन्होंने बताया कि ऐसे पिंड जिनका आकार 100 मीटर या अधिक है और पृथ्वी से 75 लाख किलोमीटर के भीतर से होकर गुजरते हैं बेहद खतरनाक लघु ग्रह कहलाते हैं। इनपर अंतरिक्ष एजेंसियों की नजर रहती है और इनकी कक्षाओं का पता लगाया जाता है। लघु ग्रह '2002 एजे 129Ó पृथ्वी से 42 लाख किलोमीटर की दूरी से गुजर जाएगा। इसका आकार है 500 मीटर से 1200 मीटर के भीतर है और इसकी खोज 15 जनवरी 2002 को हवाई स्थित वेधशाला से हुई थी। धरती से निकटता की स्थिति में इसकी कक्षा में अपनी गति 34 किलोमीटर प्रति सेकेंड अर्थात 1 लाख 22 हजार 400 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। यह गति ऐसे अनेक पिंडों के मुकाबले ज्यादा है और इसकी वजह है इसकी कक्षा का बेहद दीर्घवृत्ताकार होना। सूर्य का चक्कर लगाते समय यह बुध ग्रह की कक्षा के भीतर पहुंच जाता है। इसका परिभ्रमण काल है 1.61 साल। वैज्ञानिक इस लघु ग्रह की खबर पिछले 14 साल से रख रहे हैं। अगली बार इसकी बेहद निकटता की स्थिति 8 फरवरी 2172 को बनेगी और तब यह पृथ्वी से महज 6 लाख 85 हजार किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा। पृथ्वी के निकट से गुजरने वाले इस आकार के लघु ग्रह काफी कम हैं।
प्रोफेसर कपूर ने बताया कि पृथ्वी के निकट से रोजाना हजारों लाखों उल्काएं, लघु ग्रह गुजरते हैं। यह छोटे चट्टानी या धातु के टुकड़े हो सकते हैं। इनमें अधिकांश वातावरण में 80 से 90 किलोमीटर की ऊंचाई पर जलकर नष्ट हो जाते हैं। इनमें बड़े आकार के पिंड भी हैं। जिनपर नजर रखने की जरूरत है। पृथ्वी निकट सभी पिंड खतरनाक नहीं, इनमें से कुछ पर अंतरिक्षयान उतारकर बहुमूल्य धातुओं आदि के उत्खनन की संभावनाओं पर भी विचार हुआ है। इनका अध्ययन सौरमंडल के इतिहास पर महत्वपूर्ण रौशनी डाल सकता है। आगामी 4 फरवरी की इस घटना के अध्ययन के लिए भी वैज्ञानिकों ने तैयारियां कर ली हैं। अमरीका में कैलिफोर्निया की गोल्डस्टोन रेडियो टेलीस्कोप और आरएसीबो की रेडियो टेलीस्कोप का इस्तेमाल होगा। राडार से रेडियो तरंगे भेजकर जो सिग्नल हमें वापस मिलेगा उससे इसका खाका बनाया जा सकेगा। इससे उसकी शक्ल और अक्ष भ्रमण पर महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकेगी। सेरेस और वेस्टा लघु ग्रहों के अध्ययन के लिए भेजा गया अंतरिक्षयान डॉन तथा बेन्नू के लिए भेजा गया ओएसआईआरआईएस-आरईएक्स इसी अध्ययन की कड़ी हैं।
Published on:
31 Jan 2018 07:29 pm
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