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हर सूर्यास्त जीवन का एक दिन कम करता है-साध्वी भव्यगुणाश्री

धर्मसभा का आयोजन

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हर सूर्यास्त जीवन का एक दिन कम करता है-साध्वी भव्यगुणाश्री

हर सूर्यास्त जीवन का एक दिन कम करता है-साध्वी भव्यगुणाश्री

बेंगलूरु .विमलनाथ जैन मंदिर जिनकुशल सूरी दादावाड़ी बसवनगुड़ी में विराजित साध्वी भव्यगुणाश्री ने कहा कि जब हमारा जन्म हमारी मर्जी से नहीं होता और मरण भी हमारी मर्जी से नहीं होता तो इस जन्म-मरण के बीच में होने वाली सारी व्यवस्था हमारी मर्जी से कैसे हो सकती हैं। याद रखें एक सच्चा इंसान जीवन के हर परिस्थिति में भगवान की कृपा अनुभव करता है। बाकी निभाने वाले ही तो नहीं मिलते चाहने वाले तो हर मोड़ पर खड़े हैं। हर सूर्यास्त हमारे जीवन से एक दिन कम कर देता है..लेकिन हर सूर्योदय हमें आशा भरा एक और दिन दे देता है इसलिये सदैव बेहतर की उम्मीद करें..

.जिंदगी है तो ख्वाब है, ख्वाब है तो मंजिलें हैं, मंजिलें हैं तो रास्ते है, रास्ते है तो मुश्किलें हैं, मुश्किलें हैं तो हिम्मत है, हिम्मत है तो सफलता है। इसलिए विचार कीजिए। साध्वी शीतलगुणाश्री ने कहा कि किसी ने कूछा ज़हर क्या है बहुत सुन्दर जबाब दिया हर वह चीज़ जो ज़िन्दगी में आवश्यकता से अधिक होती है वही ज़हर है। फ़िर चाहे वह ताक़त हो, धन हो, भूख हो, लालच हो, अभिमान हो, आलस हो, महत्वाकांक्षा हो, प्रेम हो या घृणा जहर ही है। जिंदगी तेरा कैसा ये फलसफा है एक इन्सान के आने की खबर, नौ महीने पहले ही आ जाती है पर जाने की खबर नौ सेकंड पहले भी नहीं आती बंद लिफाफे में रखी चिट्ठी सी है ये जिंदगीपता नहीं अगले ही पल कौन सा पैगाम ले आए। जवेरीलाल गुलेच्छा ने बताया कि साध्वी के दर्शनार्थ राजेन्द्र सूरी परिषद की महिलाओं ने लाभ लिया। अध्यक्ष प्रेमाबेन गांधीमूथा, मंजु ओस्तवाल, कविता ओस्तवाल, कंचन बालगोता, इंद्रा छत्रगोता, कंचन श्रीश्रीश्रीमाल, संतोष संघवी, रेखा भंडारी, संगीता लूणिया, सीमा सोलंकी निशा चोपडा ने लाभ लिया।