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कब तक व्याख्याताओं की कमी का खामियाजा भुगतेंगे विद्यार्थी!

सरकारी कॉलेजों, विश्वविद्यालयों में 75 फीसदी संकाय पद रिक्त

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कब तक व्याख्याताओं की कमी का खामियाजा भुगतेंगे विद्यार्थी!

कब तक व्याख्याताओं की कमी का खामियाजा भुगतेंगे विद्यार्थी!

सरकारी कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में व्याख्याताओं के पद खाली होने के बावजूद राज्य सरकार नियुक्तयां करने में विफल रही है। इसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। सरकारी कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में शिक्षण कर्मचारियों की भारी कमी है। करीब 75 फीसदी संकाय पद रिक्त हैं और अतिथि व्याख्याताओं से काम चलाया जा रहा है। सबसे अधिक रिक्तियां मैसूरु विश्वविद्यालय में हैं। इसके 460 स्वीकृत शिक्षण पदों में से 407 पद खाली हैं। कर्नाटक विश्वविद्यालय में 600 में से 386 पद खाली हैं। राज्य के 12 हजार से ज्यादा व्याख्याता सेवा नियमित करने सहित अन्य मांगों को लेकर बीते 23 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।

शिक्षाविदों के अनुसार सरकार ने हर जिले में कम-से-कम एक विश्वविद्यालय स्थापित करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन आवश्यक बुनियादी ढांचा या संकाय उपलब्ध कराने में बुरी तरह विफल रही है। ज्यादातर कॉलेज अतिथि व्याख्याताओं पर निर्भर हैं। कुछ कॉलेजों में तो अतिथि व्याख्याता तक नहीं हैं। उन्हें पाठ्यक्रम पूरा कराने में संघर्ष करना पड़ता है। कुछ मामलों में, पूरे विषय ही नहीं पढ़ाए जा रहे हैं। ऐसे में नए विश्वविद्यालयों और इसके छात्रों के भविष्य का अंदाजा लगाया जा सकता है। हाल ही में स्थापित कुछ विश्वविद्यालयों में एक भी शैक्षणिक पद नहीं भरा गया है। डॉ. गंगूबाई हंगल संगीत एवं प्रदर्शन कला विश्वविद्यालय में 15 स्वीकृत शिक्षण पद हैं, जिनमें से अधिकांश रिक्त हैं।

पहले मौजूदा ढांचे को मजबूत करें

बेंगलूरु विश्वविद्यालय के एक पूर्व कुलपति का मानना है कि सरकार नए विश्वविद्यालय स्थापित करने से पहले मौजूदा कॉलेजों व विश्वविद्यालयों को मजबूत करे। एक अन्य कुलपति के अनुसार सरकार को साल दर साल अतिथि व्याख्याताओं पर निर्भरता कम करनी चाहिए। योग्यता के आधार पर व्याख्याताओं की नियुक्ति की जानी चाहिए। शिक्षा विभाग के एक उच्च अधिकारी के अनुसार गत वर्ष भी करीब 14,000 अतिथि व्याख्याता हड़ताल पर गए थे। जब सरकार ने इन व्याख्याताओं की सेवाओं को समाहित करने का प्रयास किया, तो कई अपने पदों के लिए अनुपयुक्त पाए गए।

मंत्री जमीनी हकीकत से अनजान

उच्च शिक्षा मंत्री एमसी सुधाकर ने हाल ही में बताया था कि राज्य के 32 सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में 3,987 स्वीकृत शिक्षण पदों में से 1,846 रिक्त हैं। मंत्री ने यह दावा भी किया था कि रिक्तियों के कारण शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित नहीं हुई है। हालांकि, इस बयान के लिए उनकी काफी आलोचना हुई थी। शिक्षाविदों के अनुसार मंत्री जमीनी हकीकत से दूर हैं।