
विद्यार्थी बस पास योजना पर पूर्व मंत्री पाटिल ने अपनी ही सरकार को घेरा
बेंगलूरु. विधान परिषद में विद्यार्थियों के बस पास योजना को लेकर बुधवार को शून्यकाल के दौरान परिवहन मंत्री डी.सी.तम्मण्णा के जवाब से नाराज कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य एस.आर.पाटिल ने जम कर प्रहार किए।
पाटिल ने कहा कि विद्यार्थियों की बस पास योजना को पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने पेश किए गए बजट में अनुदान आवंटित किया है। मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी ने बजट पेश करते हुए सिद्धरामय्या के बजट के सभी कार्यक्रम यथावत जारी रखने की बात कही है। इस योजना के लिए धन आवंटन नहीं होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। परिवहन मंत्री को यह योजना जारी रखनी होगी।
पाटिल के इस अनपेक्षित बयान से सत्तासीन कांग्रेस-जद (एस) के साथ विपक्षी भाजपा के सदस्य भी भौंचक्के रह गए। भाजपा के कई सदस्यों ने मेज थपथपा कर पाटिल के बयान का समर्थन किया। इस दौरान सदन में मौजूद कांग्रेस-जद (एस) के सदस्य एक दूसरे का मुंह ताकते नजर आएं। इससे पहले आइवन डिसूजा ने शून्य काल के दौरान यह यह मामला उठाते हुए कहा कि विद्यार्थियों के लिए नि:शुल्क बस पास योजना जारी रखनी चाहिए। इस प्रस्ताव के जवाब में परिवहन मंत्री ने कहा कि बस पास योजना के लिए राज्य सरकार 50 फीसदी राशि का वहन कर रही है।
इस योजना के लिए राज्य सरकार ने निगम को 500 करोड़ बकाए की राशि जारी नहीं की है। साथ में निगम घाटे में होने के कारण इस योजना की व्यावहारिकता पर भी सवालिया निशान लगा है। मंत्री के इस बयान पर भाजपा के कई सदस्यों ने कड़ा विरोध किया और इसी मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं पर लाठियां भांजने की निंदा की ।
इस पर मंत्री ने भाजपा सदस्यों से पूछा कि क्या अभाविप निगम को बकाया 500 करोड़ का भुगतान करेगी तो भाजपा के सदस्य आक्रोशित हो गए और उनकी कांग्रेस के सदस्यों से नोंक-झोक शुरू हो गई। तब सभापति ने परिवहन मंत्री को इस मामले में गुरुवार को सदन में सरकार की ओर से जवाब देने के निर्देश दिए।
नहीं बढ़ेगी अधिवेशन की अवधि : मंत्री
सरकार ने विधानमंडल के मौजूदा अधिवेशन की अवधि तीन-चार दिनों के लिए बढ़ाने की विपक्षी पार्टी भाजपा की मांग खारिज कर दी है। संसदीय व कार्य मंत्री कृष्णा बैरेगौड़ा ने कहा कि सत्र की अवधि नहीं बढ़ाई जाएगी। इससे पहले भाजपा के सदस्यों ने अधिवेशन की अवधि बढ़ाने की मांग करते हुए कहा था कि कई मसलों पर चर्चा के लिए उन्हें मौका नहीं मिल पाया। अधिकांश समय बजट पर ही चर्चा हुई जबकि बाकी मुद्दों के लिए पर्याप्त समय नहीं मिला।
Published on:
12 Jul 2018 11:07 pm
बड़ी खबरें
View Allबैंगलोर
कर्नाटक
ट्रेंडिंग
