
बेंगलूरु. पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश हत्याकांड की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआइटी) ने विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर पुष्टि की है कि गोली २४ वर्षीय परशुराम वाघमारे ने ही चलाई थीं।
एसआईटी ने गौरी लंकेश के निवास और अन्य भवनों पर लगे सीसीटीवी के फुटेजों के दृश्यों और घटना की साक्ष्यपरक पुनरावृत्ति की वीडियो क्लिप को गुजराज में एफएशएल को भेजा था।
एसआइटी ने पहले इस हत्याकांड मामले में परशुराम समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की थी। परशपुराम ने पहले ही माना था कि उसी ने गौरी लंकेश पर गोलियां चला कर हत्या की थी। फिर भी एसआइटी कई दिनों से एफएसएल की रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रही थी। जिस समय गौरी लंकेश की हत्या हुई थी। उस समय घटनास्थल के आसपास तीन निर्माण मजदूर और रायचूर निवासी पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहा एक छात्र उपस्थित थे।
हत्या से पहले इन लोगों ने बगैर हेलमेट के तीन आरोपियों को गौरी लंकेश के निवास के सामने घूमने और इधर-उधर भटकते देखा था। एसआइटी ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया था, उन्हें इन चार गवाहों के सामने पेश किया था, जिन्होंने आरोपियों में से तीन की पहचान की थी।
इससे पहले आरपियों के स्कैच तैयार किए थे।
गौरी लंकेश के करीबी दुकान के मालिक से भी बयान लिया गया था। उसने भी दो आरोपियों द्वारा गौरी के बारे में विवरण संग्रहित किए जाने की बात कही थी। मागड़ी रोड के सीगेहल्ली के एक मकान के मालिक सुरेश ने परशुराम और सुजीत कुमार को मकान किराए पर दिया था। सुरेश ने भी इनकी पहचान की थी।
सीसीटीटी के फुटेज में गौरी लंकेश पर गोलियां चलाने वाले का कद पांच फीट दो इंच था। परशुराम का कद भी इतना ही है। अब स्पष्ट हो चुका है कि परशुराम ने ही गौरी पर गोली चलाई।
एसआइटी ने आरोपियों को काली रंग की पल्सर बाइक बेचने वाले सागर लाखे (३०) को भी गिरफ्तार किया है। वह गणेशपुर का निवासी है। इस पर गौरी की हत्या करने वालों की मदद का आरोप है। वह आरोपी भरत कुराणे के होटल के उद्यान की रखवाली करता था। भरत कुराणे के मोबाइल फोन के कॉल की जांच करने पर पता चला कि सागर लाखे ने भी बातें की थीं।
Published on:
05 Sept 2018 08:06 pm
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