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वीेरेंद्र हेगड़े : 20 साल की उम्र में ‘धर्माधिकारी’ का पद संभालने से लेकर राज्यसभा तक का सफर

- देश को मिलेगा उनके अनुभवों का लाभ : मुख्यमंत्री बोम्मई- Rajya Sabha में मनोनयन: बढ़ेगी उच्च सदन की गरिमा

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हेगड़े का मनोनयन राज्य की संस्कृति का सम्मान

हेगड़े का मनोनयन राज्य की संस्कृति का सम्मान


Karnataka से राज्यसभा के लिए मनोनीत Dr. Virendra Heggade किसी परिचय के मोहताज नहीं। 25 नवम्बर 1948 को बंटवाल तालुक में जन्मे हेगड़े का नाम धर्मनिष्ठा और समाजोत्थान का पर्याय बन चुका है। अपार और बेजोड़ लोकप्रियता के बावजूद उन्हें कभी सत्ता का मोह नहीं हुआ और वे निर्लिप्त भाव से परमसत्ता से जुड़कर जनता जनार्दन की सेवा करते रहे हैं।

मुख्यमंत्री Basavaraj Bommai ने गुरुवार को हेगड़े से शिष्टाचार भेंट की। बाद में बोम्मई ने कहा कि हेगड़े के लंबे अनुभव से देश को लाभ मिलेगा। बोम्मई ने कहा कि डॉ हेगड़े अपने ज्ञान के माध्यम से राज्यसभा में बहस की गुणवत्ता को उच्च स्तर तक बढ़ाएंगे।

दरअसल, हेगड़े Karnataka की उस धरती पर पले बढ़े हैं जो जैन संतों से लेकर, माधवाचार्य, आदि शंकराचार्य और बसवन्ना के संदेशों से अनुप्राणित है। यहां कई धार्मिक स्थल ऐसे हैं जो श्रद्धालुओं के आध्यात्मिक उन्नयन के साथ ही समाज की आर्थिक समृध्दि का आधार बने हैं और सामाजिक उत्थान की भी अलख जगा रहे हैं।

ऐसा ही एक धार्मिक स्थल है Dakshina Kannada District स्थित श्री क्षेत्र, धर्मस्थल। लगभग 800 साल पहले स्थापित धर्मस्थल के प्रमुख हेगड़े परिवार की 21वीं पीढ़ी के धर्माधिकारी हैं संसद के उच्च सदन के लिए मनोनीत डॉ. डी. वीरेंद्र हेगड़े। संतों से मिला समाजोत्थान का संदेश ही उनकाजीवन बन गया है। मंदिर के प्रमुख को धर्माधिकारी कहा जाता है। वीेरेंद्र हेगड़े ने वर्ष 1968 में महज २० साल की उम्र में यह जिम्मेदारी संभाली थी।

लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के प्रयास

धर्मस्थल मंजुनाथेश्वर धर्मोत्थान ट्रस्ट का नेतृत्व कर रहे Dr. Hegde का यूं तो पूरे राज्य में विशेष सम्मान है। लेकिन, दक्षिण कन्नड़ में उनका अदब और लिहाज किसी को भी अचंभित कर सकता है। लोग उनके सामने सिर झुकाकर बात करते हैं और उनकी बात को अंतिम मानते हैं। वजह एक ही है, डॉ. हेगड़े शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, नारी शक्ति, स्वावलंबन सहित तमाम क्षेत्रों में सीधे लोगों के जीवन से जुड़े हैं। उनके जीवन को बेहतर बना रहे हैं, वह भी बिना किसी स्वार्थ या भेदभाव के। ट्रस्ट अभी तक हजारों कन्याओं का विवाह कर चुका है और नव दम्पती को रोजगार भी मुहैया करा चुका है।

मेंगलूरु, उडुपी, धारवाड़, हासन, मैसूरु सहित कई जिलों में स्थापित 25 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों में युवाओं का भविष्य संवारा जा रहा है तो सिध्दवन गुरुकुल के माध्यम से 250 से अधिक विद्यार्थियों को योग व संस्कृत की शिक्षा देकर भारतीय संस्कृति के उन्नयन के लिए भी भगीरथ प्रयास किया जा रहा है। साल में एक बार सर्व धर्म सम्मेलन में जहां सौहार्द और समन्वय की संस्कृति का पोषण होता है वहीं ग्रामीण इलाकों में पेयजल से लेकर रोजगार तक की व्यवस्था का जिम्मा संभाला जा रहा है। उनके सेवाकार्यों को देखते हुए वर्ष 2000 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।

दिगंबर समुदाय से आने वाले हेगड़े वर्तमान में धर्मस्थल मंजुनाथ स्वामी मंदिर के ट्रस्टी हैं। यहां भगवान शिव के मंजुनाथ रूप की पूजा होती है और औसतन प्रतिदिन 10,000 से अधिक लोग प्रसाद के रूप में भोजन ग्रहण करते हैं। मंदिर का महात्म्य ऐसा है कि यहां कभी चोरी-उठाईगिरी नहीं होती।

हेगड़े का मनोनयन कर्नाटक की सदियों पुरानी परमार्थ संस्कृति का सम्मान है और राज्यसभा में उनकी मौजूदगी से सदन की गरिमा बढ़ेगी।