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आवरण हट जाए तो शरीर से हो जाएगी नफरत-डॉ. महाप्रज्ञा

श्रीरंगपट्टनम में धर्मचर्चा

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आवरण हट जाए तो शरीर से हो जाएगी नफरत-डॉ. महाप्रज्ञा

आवरण हट जाए तो शरीर से हो जाएगी नफरत-डॉ. महाप्रज्ञा

बेंगलूरु. श्रीरंगपट्टनम में दिवाकर गुरु मिश्री राज दरबार में साध्वी डॉ. कुमुदलता आदि ठाणा के चातुर्मास अन्तर्गत बुधवार को डॉ. महाप्रज्ञा ने धर्मचर्चा में जनम मरण की महत्ता बताते हुए कहा कि मानव जन्म पाकर ये मनुष्य का शरीर जो हमने पाया है, यह एक प्रकार से विशिष्ट उपलब्धि है, ये निर्विवाद सत्य है, इसको नकारा नहीं जा सकता। इस शरीर की क्षमता और उपयोगिता दोनों बेनमूना है, इसमे भी दो राय नहीं। परंतु किस कार्य क्षेत्र में इस शरीर का उपयोग किया जा रहा है ये अवश्य सोचनीय विषय है, समझने योग्य इश्यू है। ज्ञानियों ने हमे बड़ी क्लियरिटी के साथ ये बताया है कि हम निगोद से निकल कर एक अत्यंत लंबा सफर तय कर यहां तक पहुंचे हैं। बड़ी कठिनाई से ये अचीव किया है और ये उत्तरोत्तर प्रगति है, ऊघ्र्वगमन है और अब ये अवसर पाया है कि यहां से सीधा फाइनल राउंड ले सकते हैं। इस अभियान में इस शरीर का बेस्ट उपयोग करने का चांस दर्शाया है। परंतु परेशानी यह है कि जीव को अनादि से अपने और विजातीय शरीर का आकर्षण रहा है। इसी कारण से जीव को अनादि से चार संज्ञा भी होती है। आहार, मैथुन, परिग्रह, और भय। शरीर के आकर्षण के कारण जीव अनंतानंत बार बर्बाद हुआ है। अनंत दुखों को भोग चुका है, और अभी भी उसी आकर्षण के पीछे भागने के कारण ही दुखी हो रहा है। हम अपने शरीर को सुंदर बताने का प्रयत्न करते रहते हैं और उसके लिए शृंगार भी करते रहते हैं उसका कारण विजातीय को आकर्षित करना है, और विजातीय शरीर का हमें आकर्षण हैं। उन्होंने कहा कि परंतु एक कड़वा सत्य है कि यदि इस शरीर की चमड़ी को हटाया जाए तो मात्र मांस, लहू, परु, मल, मूत्र आदि ही दिखता है, जो भयंकर अशुची रूप है, अप्रदर्शनीय है, असहनीय है, अपितु, सत्य है, और केवल सत्य यही है। बस एक आवरण है जो यदि हटा दिया जाए तो हमें इस शरीर से नफरत हो जाए, उस पर घिन्नता हो जाए।
उपरोक्त सत्य का चिंतन कर अपने शरीर और विजातीय शरीर के मोह का त्याग करना चाहिए। इसके लिए इस अशुचि भावना का चिंतन आवश्यक है। आत्मा के लिए, अन्य सर्व पदार्थ अशुचि ही है जो यह स्वभाव आत्मा की मुक्ति के लिए बाधाकारक है। समिति के कार्य अध्ययक्ष मानमल दरला ने बताया कि बुधवार को मैसूरु, मंड्या के अलावा बेेंगलूरु से भी अनेक श्रद्धालु साध्वी डॉ. कुमुदलता आदि ठाणा के दर्शन और वन्दन के लिए पहुंचे।